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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Feb 2018

    156. यहाँ सुबह से खेला करती है शाम!

    पुराने ब्लॉग्स तो फिर से पढ़ते ही रहेंगे, आज किशोर दा को उनके एक गीत के बहाने याद कर लेते हैं। किशोर कुमार जी शायद भारतीय फिल्म संगीत में सबसे लोकप्रिय पुरूष गायक रहे हैं। एक समय ऐसा भी आया कि जब किशोर कुमार जी की बढ़ती डिमांड के कारण, सुरों के बादशाह माने जाने…

  • 13th Feb 2018

    155. जो तार से निकली है, वो धुन सबने सुनी है!

    मैं अक्सर मुकेश जी के गाए गीत दोहराता हूँ, क्योंकि वे मेरे परम प्रिय गायक हैं, मैं दिल से उनके साथ जुड़ा हूँ, लेकिन यह सच्चाई है कि हमारे देश में एक से एक महान गायक हुए हैं और उनमें से अनेक फिल्म जगत से जुड़े रहे हैं। आज मुझे तलत महमूद जी का गाया…

  • 12th Feb 2018

    19. हम खें जुगनिया बनाय गए, अपुन जोगी हो गए राजा

    प्रस्तुत है एक और ब्लॉग, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस परीक्षा में मैं सफल हुआ और उसके आधार पर ही आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक पद के लिए मेरा…

  • 11th Feb 2018

    18. भूख मिट नहीं सकती, पेट भर नहीं सकता ज़िंदगी के हाथों में, कौन सा निवाला है!

    चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। दिल्ली से जाल समेटने से पहले, कुछ और बातें कर लें। वैसे तो रोज़गार की मज़बूरियां हैं वरना कौन दिल्ली की गलियां छोड़कर जाता है। वैसे भी यह तो अतीत की बात है, मैं इसे कैसे बदल सकता हूँ? अगर बदल सकता तो कुछ…

  • 10th Feb 2018

    154. रोशनी हो न सकी, दिल भी जलाया मैंने!

    आज मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, यह  गीत उन्होंने फिल्म- ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र जी  के लिए गाया है, संगीतकार हैं- कल्याणजी आनंदजी, जो उन संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने मुकेश जी की अनूठी आवाज़ का भरपूर इस्तेमाल किया है। इसके गीतकार हैं- शमीम जयपुरी।…

  • 9th Feb 2018

    17. लेखनी मिली थी गीतव्रता, प्रार्थना पत्र लिखते बीती!

    फिलहाल वही काम कर रहा हूँ, जो सबसे आसान है, अपने पुराने ब्लॉग दोहराना, लीजिए प्रस्तुत है एक और ब्लॉग।  ऐसा लगता है कि कवियों, साहित्यकारों की बात अगर करते रहेंगे तो दिल्ली छोड़कर आगे ही नहीं बढ़ पाएंगे। लेकिन कुछ लोगों की बात तो करनी ही होगी। आज पहले एक गोष्ठी की बात कर…

  • 8th Feb 2018

    16. घर, शहर, दीवार, सन्नाटा- सबने हमें बांटा

    लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग। जिस प्रकार लगभग सभी के जीवन में भौतिक और आत्मिक स्तर पर घटनाएं होती हैं, जिनको शेयर करना समीचीन होता है। मैं प्रयास करूंगा कि जहाँ तक मेरी क्षमता है, मैं रुचिकर ढंग से इन घटनाओं को आपके सपने रखूं। इस क्रम में अनेक नगर, व्यक्ति और उल्लेखनीय…

  • 7th Feb 2018

    153. धूप, धुआं, पानी में

    आज एक नवगीत याद आ रहा है, नीलम सिंह जी का लिखा हुआ, यह गीत जिस समय मैंने पढ़ा था, बहुत अच्छा लगा था और आज तक याद है। इस गीत में जो मुख्यतः अभिव्यक्त किया गया है, वह यही है कि जीवन में जो कुछ झेलना पड़ता है, उसके बारे में सोचते रहें, मन…

  • 6th Feb 2018

    15. नक्काशी करते हैं नंगे जज़्बातों पर

    लीजिए पुरानी कहानी को और आगे बढ़ाते हैं, प्रस्तुत है अगला पन्ना।  दिल्ली में उन दिनों तीन-चार ही ठिकाने होते थे मेरे, जिनमें से बेशक उद्योग भवन स्थित मेरा दफ्तर एक है, उसके अलावा शाम के समय दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी या फिर कनॉट प्लेस, जहाँ अनेक साहित्यिक मित्रों से मुलाक़ात होती थी। इसके अलावा जब…

  • 5th Feb 2018

    14. इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है!

    लीजिए पुरानी कहानी का एक पन्ना और खोल रहा हूँ। जीवन में कोई कालखंड ऐसा होता है, कि उसमें से किस घटना को पहले संजो लें, समझ में नहीं आता है। अब उस समय को याद कर लेते हैं जब सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार और नाइंसाफी के विरुद्ध जयप्रकाश नारायण जी ने ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन…

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