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इब्तदा कुछ इस तरह
किसी ने फिर न सुना, दर्द के फसाने को मेरे न होने से राहत हुई ज़माने को। खैर दर्द का फसाना सुनाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। ज़िंदगी के साथ, इस राह में मिले कुछ विशेष पात्रों, विशेष परिस्थितियों के साथ हुए ऐसे अंतर्संवाद, जिनमें मुझे ऐसा लगता है कि अन्य लोगों की…
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चल अकेला
हज़ारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते, यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला। चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला । मुकेश जी के गाये इस गीत ने जीवन में बहुत बार हिम्मत दी है। वैसे कुछ मामलों में इंसान को बड़ी जल्दी सबक मिलता…
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एक पुराना दुख
इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां । (दुश्यंत कुमार) लेकिन ये ब्लॉग लिखने का उद्देश्य तो खिड़कियों को खोलने का प्रयास करना ही है। एक पुराना अनुभव साझा कर रहा हूँ, उससे पहले ये पंक्तियां याद आ रही हैं- एक पुराने दुख ने…
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आसमान धुनिए के छप्पर सा
आज अपनी ब्लॉगिंग यात्रा की सबसे पहली पोस्ट दुबारा शेयर कर रहा हूँ जो लगभग 8 वर्ष पहले लिखी थी। किसी गुमनाम से एक शहर में पैदा हुए थे हम नहीं है याद पर कोई अशुभ सा ही महीना था,रजाई की जगह ओढ़ी पुआलों की भभक हमनेविरासत में मिला हमको, हमारा ही पसीना था।यह पंक्तियां…