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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Feb 2019

    कोल्हापुर-महाराष्ट्र

    कल शुरू किया था एक यात्रा विवरण, आज उसको निपटा लेता हूँ। जहाँ गया था ‘बारामती’, वहाँ तक का तो बस रास्ता ही तय किया, कुछ मंदिर हैं वहाँ पर, उनको भी नहीं देख पाया, शाम होते-होते सोचा कि अब वापसी यात्रा पर चलते हैं। यह फैसला किया था कि वापसी में कोल्हापुर घूमते हुए…

  • 22nd Feb 2019

    रास्ता सिर्फ!

    यात्रा संबंधी ब्लॉग में अक्सर किसी ऐसे स्थान पर जाकर वहाँ का अनुभव शेयर किया जाता है, जहाँ कोई प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक अथवा राजनैतिक महत्व और आकर्षण होता है, लेकिन वास्तव में यात्रा का अनुभव भी अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो प्रमुख स्थान हैं उनके बारे में तो काफी साहित्य होता ही…

  • 21st Feb 2019

    सुनहरी नाव

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 20th Feb 2019

    है नमन उनको, कि जिनके सामने बौना हिमालय!

    यादों के समुंदर से एक और मोती, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग, थोड़े संपादन के साथ! मैंने लखनऊ प्रवास का ज्यादा लंबा ज़िक्र नहीं किया और ऊंचाहार के सात वर्षों को तो लगभग छोड़ ही दिया, क्योंकि मुझे लगा कि जो कुछ वहाँ हुआ, वह पहले भी हो चुका था। राजनीति की कोई…

  • 19th Feb 2019

    On being Flexible!

    I remember some characters seen in some movies. Say some retired military official, who enforces strict discipline in his house. Like everybody in the family to be present on the dining table exactly at 8 PM, anybody who is late can’t take dinner with the family! Such rules framed as per the desires of a…

  • 17th Feb 2019

    True Soldier, What I think about!

    The incident which took place in Pulwama resulting in the tragic death of 40 bravehearts of CRPF shook the nation. This is another example of cowardice of the Pakistani military, their adopted children- the terrorists on both sides of the borders and specially those who are fed in India and they work as Pakistani agents…

  • 15th Feb 2019

    कहते तो हैं भले की वो लेकिन बुरी तरह!

    आज गुलाम अली साहब का गाई एक बेहद खूबसूरत गज़ल के कुछ शेर शेयर कर रहा हूँ। यह गज़ल उर्दू के मशहूर शायर ‘मोमिन’ जी की लिखी हुई है और गुलाम अली साहब ने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ गाया है। रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह, अटका कहीं जो आप का दिल भी…

  • 14th Feb 2019

    मेरी नज़रों की तरफ देख, ज़माने पे न जा!

    आज रफी साहब का गाया एक बेहद खूबसूरत गीत याद आ रहा है।है। यह गीत 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- हमसाया के लिए रफी साहब ने ओ.पी.नैयर साहब के संगीत निर्देशन में बड़ी खूबसूरती के साथ गाया है और इसके लेखक थे- ज़नाब शेवान रिज़वी जी। इस गीत में नायक यही कहता है कि उसे,…

  • 13th Feb 2019

    माली- 13: मैंने कुछ नहीं पूछा

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘The Gardener Xiii:…

  • 12th Feb 2019

    हम जी के क्या करेंगे!

    ऐसे ही एक बहुत पुराने गीत की रोचक ‘अंडरस्टैंडिंग’ दिमाग में आई, फिर सोचा कि इस पुराने गीत को भी शेयर कर लेता हूँ। वैसे हिंदी फिल्म-संगीत में रुचि रखने वाला कोई ऐसा प्राणी तो मिलना मुश्किल है, जिसने यह गीत कभी न सुना हो, खास कर पुरानी पीढ़ी में! हाँ तो, जो बात मेरे…

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