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जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं!
कल ही मैंने ‘पेरेंटिंग’ पर लिखी अपनी ब्लॉग पोस्ट के बाद बचपन की खूबसूरती, मदमस्ती और अलग ही दुनिया को याद करते हुए, श्री सुदर्शन फाकिर जी का लिखा गीत शेयर किया था। आज बचपन की ही खूबसूरती को दर्शाने वाली एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जनाब जावेद अख्तर साहब की लिखी हुई। बहुत…
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वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी!
अभी एक मंच पर सप्ताहांत में दिए जाने वाले विषय के अंतर्गत ‘पेरेंटिंग’ पर, आज के समय में अभिभावकों की भूमिका पर अंग्रेजी में कुछ लिखने का अवसर मिला। इस विषय में विचार किया तो खयाल आया कि कितना फर्क आ गया है, हमारे समय के बचपन से आज के बचपन में! वैसे फर्क जितना…
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मस्त पवन गाये लोरी!
सदाबहार गायक मुकेश जी के गाये गीतों के क्रम में आज जो गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, वह एक लोरी है, अलग तरह की लोरी, जो किसी बच्चे को नहीं अपितु दुखियारी नायिका को सुलाने के लिए गायी गई है। आज का गीत पुनर्जन्म की कथा पर आधारित फिल्म- ‘मिलन’ के लिए लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी…
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Parenting- then and now!
Today I have to discuss on a serious subject like- Parenting. Yes the need of taking parenting seriously was never as important, as it is today. I am now a grand- parent, but to tell the truth, I have never been a serious parent or now a grand-parent. I remember our childhood days, there was…
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52. पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था!
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- मेरे एक पुराने मित्र एवं सीनियर श्री कुबेर दत्त का एक गीत मैंने पहले भी शेयर किया है, उसकी कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं- करते हैं खुद से ही, अपनी चर्चाएं सहलाते गुप्प-चुप्प बेदम संज्ञाएं, बची-खुची खुशफहमी, बाज़ारू लहज़े में, करते हैं विज्ञापित, कदम…
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51. लेकिन दृश्य नहीं बदला है !
लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज बहादुरी के बारे में थोड़ा विचार करने का मन हो रहा है। जब जेएनयू में, करदाताओं की खून-पसीने की कमाई के बल पर, सब्सिडी के कारण बहुत सस्ते में हॉस्टलों को बरसों-बरस पढ़ाई अथवा शोध के नाम पर घेरकर पड़े हुए, एक विशेष विचारधारा के विषैले प्राणी…
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अपने हाथों में हवाओं को गरिफ्तार न कर!
सदाबहार गायक मुकेश जी के गाये, प्रेमगीतों के क्रम में आज जो गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, वह अपने आप में अलग तरह का गीत है। ऐसी परिस्थिति का गीत जबकि सब कुछ प्रेम के विरुद्ध होता है। आज का गीत 1968 में रिलीज हुई फिल्म- ‘हिमालय की गोद में’ के लिए कल्याणजी आनंदजी के…
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आईना हूँ मैं तेरा!
महान इंसान और अमर गायक मुकेश जी के गाये, ऐसे प्रेमगीतों के क्रम में जिनमें नायिका का सौंदर्य वर्णन बहुत सुंदर रूप में किया गया है, आज भी मैं ऐसा ही एक और प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का गीत 1968 में रिलीज हुई फिल्म- ‘साथी’ के लिए मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा…
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न ज़ुबाँ को दिखाई देता है, न निग़ाहों से बात होती है!
महान इंसान और गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम और नायिका सौंदर्य वर्णन के सुंदर गीतों के क्रम में आज मैं एक और प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का गीत 1970 में रिलीज हुई फिल्म- ‘मॉय लव’ के लिए आनंद बक्शी जी ने लिखा था, जिसे मुकेश जी ने दान सिंह जी के…
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WOW-Learning what to do, what not!
Life is a continuous process of learning. Today I have to talk about what ‘I’ll never do _____ again, because’, yes we take such decisions based on pleasant and unpleasant happenings. At present I am living in Goa, it is a nice place but not much to learn here! One reason being that I do…