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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jun 2020

    खेल-खिलौने- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 29th Jun 2020

    जिगर मा बड़ी आग है!

    ओंकारा फिल्म का एक गीत याद आ रहा जो गुलज़ार साहब ने लिखा, एक तरह से एक्स्प्रेशन के मामले में एक्सपेरीमेंट है| इस गीत का संगीत दिया है विशाल भारद्वाज जी ने और इसे गाया है सुनिधि चौहान और सुखविंदर सिंह ने| लीजिए इस गीत की कुछ पंक्तियाँ देख लेते हैं-     ना गिलाफ,…

  • 28th Jun 2020

    मरघट में पी खामोशी से, पनघट पर शोर मचाकर पी!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है –     आस्था के बारे में एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना था। ये माना जाता है कि यदि आप सच्चे मन से किसी बात को मानते हैं, इस प्रसंग में यदि आप ईश्वर को पूरे मन से मानते हैं, तो…

  • 27th Jun 2020

    Lead me Light or Darkness!

      Today again I am submitted my views based on an #IndiSpire prompt. The question is whether the role of masses is only of becoming good and obedient followers. In Indian culture and philosophy, let me refer to The Bhagvad Gita, where Lord Krishna tells in his message to Arjuna- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति…

  • 26th Jun 2020

    देवों के देव महादेव!

    मैंने पहले भी अपनी ब्लॉग पोस्ट में यह उल्लेख किया है की लॉक डाउन प्रारंभ होने के बाद हमने हॉटस्टार पर धार्मिक सीरियल – ‘देवों के देव महादेव’ देखना प्रारंभ किया था और अभी तक हम इसे देख रहे हैं| हर रोज हम 4-5 एपिसोड तो देख ही लेते हैं, और ऐसा लगता है की…

  • 25th Jun 2020

    वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था!

      आज मैं मुशायरों और कवि सम्मेलनों में ख्याति अर्जित करने वाली शायरा- सुश्री अंजुम रहबर जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर सी गजल-   मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था, वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था|   मैं उस को देखने को तरसती ही रह…

  • 24th Jun 2020

    मैंने देखा स्वप्न – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 23rd Jun 2020

    तुम प्राणों की अगन हरो तो!

      एक बार फिर से आज मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक भावुकता और प्रेम से भरा गीत शेयर कर लूँ| भावुकता वैसे तो जीवन में कठिनाई से ही कहीं काम आती है, आजकल बहुत कम मिलते हैं इसको समझने वाले, परंतु कवि-गीतकारों के लिए तो यह बहुत बड़ी पूंजी…

  • 22nd Jun 2020

    जीवन पर कविता – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 21st Jun 2020

    मायानगरी का स्वर्ण मृग !

    आज मुंबई की मायानगरी की बात कर लेते हैं, जिसे लोग हॉलीवुड की तर्ज पर बॉलीवुड भी कहते हैं| एक से एक प्रतिभाएँ रही हैं इस मुंबई में, और यह क्षेत्र भारत का फिल्मी देवलोक जैसा लगता है|     मुंबई मायानगरी का हिस्सा रहे महान कलाकारों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि कोई नाम…

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