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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Jul 2020

    इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया!

    आज एक बार फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है| संभव है यह गीत मैंने पहले भी शेयर किया हो| 1956 में रिलीज़ हुई फिल्म- देवर के लिए यह गीत आनंद बख्शी जी ने लिखा था और रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने…

  • 9th Jul 2020

    धैर्य- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 8th Jul 2020

    आज ये आँचल मुँह क्यों छुपाये!

    एक बार फिर से मैं आज अपने सर्वाधिक प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी दर्द भरे गीतों के सरताज माने जाते हैं लेकिन रोमांटिक गीत भी उन्होंने एक से एक अच्छे गाये हैं|     आज का यह गीत 1963 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘हॉलिडे इन…

  • 7th Jul 2020

    कोरोना और उसका टीका!

    हमारे देश में भी कोरोना की महामारी पिछले 3-4 महीने से कहर बरपा कर रही है और इस समय यह अपने चरम पर है| पहले  हम आंकड़ों की दृष्टि से काफी पीछे थे, लेकिन अब बढ़ते-बढ़ते विश्व में तीसरे नंबर पर आ गए हैं|     ज्योतिषियों ने कहा था कि अभी जो चंद्रग्रहण पड़ा…

  • 6th Jul 2020

    पंछी पिंजरा तोड़ के आजा, देश पराया छोड़ के आजा!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है –     आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए हैं। वैसे यह खबर नहीं, प्रक्रिया है, जो न जाने कब…

  • 5th Jul 2020

    Mediocrity versus Merit!

    Today I am talking about common people, yes- the people who form the majority anywhere and they bring all the changes in the world. It is said that these are middle class, but I would say these are mediocre people.   In the process of progression anybody can be a part of middle class or…

  • 4th Jul 2020

    मैं क्या जिया ?

    आज डॉ धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| भारती जी ने कविता, कहानी, उपन्यास आदि सभी विधाओं में अपना बहुमूल्य योगदान किया था| उनकी कुछ रचनाएँ- सूरज का सातवाँ घोडा, अंधा युग, ठंडा लोहा, ठेले पर हिमालय, सात गीत वर्ष आदि काफी प्रसिद्ध रहीं| वे साप्ताहिक पत्रिका- धर्मयुग के यशस्वी संपादक…

  • 3rd Jul 2020

    संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप!

    श्री कुबेर दत्त जी मेरे मित्र रहे थे जब वे संघर्ष कर रहे थे, दूरदर्शन में स्थापित होने से पहले| अत्यंत भावुकतापूर्ण गीत लिखा करते थे, अखबारों में छपने के लिए परिचर्चाएँ किया करते थे| एक परिचर्चा का शीर्षक मुझे अभी तक याद है- ‘ज़िंदगी है क़ैद पिंजरों में’ जिसमें उन्होंने मुझे भी शामिल किया…

  • 2nd Jul 2020

    मिली हमें अंधी दीवाली, गूँगी होली बाबू जी!

    मेरे अग्रजों में से एक डॉ कुँवर बेचैन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी उस महानन्द मिशन कॉलेज, गाजियाबाद में प्रोफेसर रहे हैं जहां मैंने कुछ समय अध्ययन किया, यद्यपि मेरे विषय अलग थे| दिल्ली में रहते हुए गोष्ठियों आदि में उनको सुनने का अवसर मिल जाता था, बाद में…

  • 1st Jul 2020

    जो पुल बनाएँगे – अज्ञेय

    आज एक छोटी सी कविता शेयर कर रहा हूँ, अज्ञेय जी की यह कविता छोटी सी है परंतु बड़ी बात कहती है| अज्ञेय जी हिन्दी साहित्य का ऐसा युगांतरकारी व्यक्तित्व थे, वे भारत में प्रयोगवाद और नई कविता के प्रणेता रहे| हाँ वे विशेष रूप से कम्युनिस्टों के निशाने पर रहते थे| कविता, कहानी, उपन्यास,…

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