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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Mar 2022

    बारिशों में पतंगें उड़ाया करो!

    ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे,बारिशों में पतंगें उड़ाया करो| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    पहले कमाया करो!

    उंगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो,खर्च करने से पहले कमाया करो| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    सभी कुछ मुआफ है, जानी!

    वो मेरी पीठ में खंज़र उतार सकता है,के जंग में तो सभी कुछ मुआफ है, जानी| राहत इन्दौरी

  • 20th Mar 2022

    लहरों का निमंत्रण!

    एक बार फिर से मैं आज स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक लंबी कविता का अंश शेयर कर रहा हूँ| सीनियर बच्चन जी, हाँ यही कहना होगा क्योंकि उनके सुपुत्र आज सदी के महानायक हैं| अपने समय के प्रमुख हिन्दी कवियों में हरिवंश राय बच्चन जी शामिल थे उनके गीतों पर श्रोतागण झूम-झूम जाते…

  • 19th Mar 2022

    वफ़ा का नाम यहाँ!

    वफ़ा का नाम यहाँ हो चुका बहुत बदनाम,मैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है, जानी| राहत इन्दौरी

  • 19th Mar 2022

    पुराना लिहाफ है, जानी!

    हमें चमकती हुई सर्दियों का खौफ नहीं,हमारे पास पुराना लिहाफ है, जानी| राहत इन्दौरी

  • 19th Mar 2022

    मैदान साफ़ है, जानी!

    हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानी,दिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी| राहत इन्दौरी

  • 19th Mar 2022

    कट-कट के सहर तक पहुँची!

    तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालूम,रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची| राहत इन्दौरी

  • 19th Mar 2022

    तेरे घर तक पहुँची!

    मैं तो सोया था मगर बारहा तुझसे मिलने,जिस्म से आँख निकलकर तेरे घर तक पहुँची| राहत इन्दौरी

  • 19th Mar 2022

    मेरे सर तक पहुँची!

    मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है,बात जब आगे बढी़ तो मेरे सर तक पहुँची| राहत इन्दौरी

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