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लो,एक बजा दोपहर हुई!
हिन्दी मंचों पर गीतों के दिव्य हस्ताक्षर स्वर्गीय भारत भूषण जी, जो मेरठ, उत्तर प्रदेश से थे और उनके अनेक गीत मैं हमेशा गुनगुनाता रहा हूं, जैसे – चक्की पर गेहूं लिए खड़ा, मैं सोच रहा उखड़ा-उखाड़ा, क्यों दो पाटों वाली चाकी, बाबा कबीर को रुला गई’, मैं बनफूल, भला मेरा- कैसा खिलना, क्या मुरझाना’…
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फिर सुशांत की बात!
आज एक बार फिर से सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करने का मन हो रहा है| सुशांत की मौत को दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और समय बीतने के साथ यह तो स्पष्ट होता जा रहा है कि सुशांत जी ने आत्महत्या तो नहीं ही की है| कौन लोग थे…
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AWARD Nomination
GREAT ACHIEVER “महासिद्धी” BLOGGER AWARD I (GAMBA I) I have been nominated by my fellow blogger Sh. Kamal Shreshtha- Kamal’s Blogginh Café- @kamalsbloggingcafe (https://kamalsbloggingcafe.wordpress.com) for the GREAT ACHIEVER “महासिद्धी” BLOGGER AWARD I (GAMBA I). I am very much thankful to Mr. Kamal Shreshtha for that and request you all to visit his site mentioned above…
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ब्लैक आउट में रोशनी की तरह!
मैंने पहले भी सूर्यभानु गुप्त जी की कुछ रचनाएँ शेयर की हैं| वे बहुत सुंदर रचनाएँ, विशेष रूप से गज़लें लिखते हैं, जिनमें उन्होंने अनेक एक्सपेरीमेंट किए हैं| कुछ शेर तो उनके मुझे अक्सर याद आते हैं, जैसे – ‘जब अपनी प्यास के सहरा से डर गया हूँ मैं, नदी बांध के पत्थर उतर गया…
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मैं जहाँ रहूँ जहाँ में, याद रहे तू !
मैं अक्सर पुरानी फिल्मों के गीत याद करता हूँ, क्योंकि मुझे पुराना फिल्मी संगीत, पुराने गायक पसंद हैं, विशेष रूप से मेरे प्रिय गायक मुकेश जी, रफी साहब, किशोर कुमार, मन्ना डे, हेमंत कुमार आदि-आदि, सचिन देव बर्मन जी भी एक गायक के रूप में उनमें शामिल हैं| इसके अलावा मुझे गजल गायक- गुलाम अली…
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Independence that is – Swaadhintaa!
We are celebrating the 74th Independence of our great nation. The country which has great culture and has been considered the ‘Vishva Guru’. Those who have faith in our rich traditions and culture rejoice by heart on this auspicious day. As a nation we never thought of grabbing the territories of other nations and always…
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कोशिश करने वालों की हार नहीं होती!
कुछ रचना पंक्तियाँ ऐसी लिखी जाती हैं कि वे मुहावरा बन जाती हैं| जैसे डॉ बशीर बद्र जी का एक शेर था- ‘उजाले अपनी यादों के, हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए|’ ऐसी ही एक पंक्ति आज की कविता की है, जिसको अक्सर लोग कहावत की तरह…
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नहीं भूलना है मुझे – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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अलविदा राहत इंदौरी जी!
विख्यात उर्दू शायर और फिल्मी गीतकार राहत इंदौरी जी नहीं रहे| जैसा कि राहत जी ने खुद ही अपने संदेश द्वारा अपने प्रशंसकों को सूचित किया था, वे कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती हुए थे और शायद 24 घंटे से कम अवधि में ही दिल का दौरा पड़…
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मौसम नहीं, मन चाहिए !
एक बार फिर से आज हिन्दी काव्य मंचों पर गीत परंपरा के एक लोकप्रिय स्वर रहे, स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस गीत में यही संदेश दिया गया है कि अगर हमारे हौसले बुलंद हों, अगर हमारे मन में पक्का संकल्प हो तो हम कुछ भी कर सकते हैं,…