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कोई लौट-लौट जाता है!
जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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जी यहाँ घबराता है!
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है,कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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रुला के गया, सपना मेरा!
कल मैंने भारतीय सिनेमा जगत के दो महान व्यक्तित्वों – राज कपूर जी को उनके जन्म दिन पर और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया था| कल मैंने राज साहब की फिल्म – ‘मेरा नाम जोकर’ का एक गीत भी उनकी स्मृति में शेयर किया था| आज…
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कहता है जोकर!
कल भारतीय सिनेमा जगत के ‘सपनों के सौदागर’ राज कपूर जी का जन्म दिन था और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी की पुण्य तिथि भी थी| एक दिन देर से ही सही मैं उन दोनों महान हस्तियों का पुण्य स्मरण करता हूँ| शैलेन्द्र जी को ‘तीसरी कसम’ बनाने की उनकी धुन ले बैठी…