-
इबादत में खलल पड़ता है!
उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो,धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है| राहत इन्दौरी
-
नाम सुनता हैं तुम्हारा तो—
ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं मगर दिल अक्सर,नाम सुनता हैं तुम्हारा तो उछल पड़ता है| राहत इन्दौरी
-
जो वीरान महल पड़ता है!
कल वहाँ चांद उगा करते थे हर आहट परअपने रास्ते में जो वीरान महल पड़ता है| राहत इन्दौरी
-
कुल्हाड़ी से नहीं कट सकता
मैं समंदर हूँ कुल्हाड़ी से नहीं कट सकताकोई फव्वारा नही हूँ जो उबल पड़ता है| राहत इन्दौरी
-
रोज़ तारों की नुमाइश में—
रोज तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है|चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता है| राहत इन्दौरी
-
त्रिया–चरित्र हवाओं का!
मेरे अत्यंत प्रिय कवि और हमेशा बड़े भाई की तरह स्नेह से मिलने वाले, श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| किशन सरोज जी को सुनना एक अलग ही तरह का दिव्य अनुभव प्रदान करता था, प्रेम के प्रति पूर्णतः समर्पित और अनोखी अनुभूतियों से हमारा साक्षात्कार…