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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Dec 2021

    इबादत में खलल पड़ता है!

    उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो,धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है| राहत इन्दौरी

  • 20th Dec 2021

    नाम सुनता हैं तुम्हारा तो—

    ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं मगर दिल अक्सर,नाम सुनता हैं तुम्हारा तो उछल पड़ता है| राहत इन्दौरी

  • 20th Dec 2021

    जो वीरान महल पड़ता है!

    कल वहाँ चांद उगा करते थे हर आहट परअपने रास्ते में जो वीरान महल पड़ता है| राहत इन्दौरी

  • 20th Dec 2021

    कुल्हाड़ी से नहीं कट सकता

    मैं समंदर हूँ कुल्हाड़ी से नहीं कट सकताकोई फव्वारा नही हूँ जो उबल पड़ता है| राहत इन्दौरी

  • 20th Dec 2021

    रोज़ तारों की नुमाइश में—

    रोज तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है|चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता है| राहत इन्दौरी

  • 20th Dec 2021

    त्रिया–चरित्र हवाओं का!

    मेरे अत्यंत प्रिय कवि और हमेशा बड़े भाई की तरह स्नेह से मिलने वाले, श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| किशन सरोज जी को सुनना एक अलग ही तरह का दिव्य अनुभव प्रदान करता था, प्रेम के प्रति पूर्णतः समर्पित और अनोखी अनुभूतियों से हमारा साक्षात्कार…

  • 19th Dec 2021

    मशालें लगातार बढ़ती गईं!

    जब मशालें लगातार बढ़ती गईं,रौशनी हारकर मुख्तसर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    एक ग़म था जो अब—

    एक ग़म था जो अब देवता बन गया,एक ख़ुशी है कि वह जानवर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    वो लहर हो गई!

    कल के औ आज के, मुझ में यह फ़र्क है,जो नदी थी कभी वो लहर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    कोई खुद्दार दीपक—

    कोई खुद्दार दीपक जले किसलिए,जब सियासत अंधेरों का घर हो गई| रामावतार त्यागी

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