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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Dec 2021

    मजबूरियों का उज़्र करें!

    हम भी मजबूरियों का उज़्र करें,फिर कहीं और मुब्तिला हो जाएं| अहमद फराज़

  • 23rd Dec 2021

    कल जाने क्या से क्या हो जाएं!

    तू भी हीरे से बन गया पत्थर,हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं| अहमद फराज़

  • 23rd Dec 2021

    क्यूँ न ए दोस्त हम–

    इससे पहले कि बेवफ़ा हो जाएं, क्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएं| अहमद फराज़

  • 23rd Dec 2021

    बौड़म जी की बस-यात्रा!

    प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर जी एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी ने कुछ कविताओं में ‘बौड़म जी’ नामक एक कैरेक्टर के माध्यम से अपनी बात कही है| आज की इस कविता में बौड़म जी की बस यात्रा की बात कही गई है, जो बस यात्रा का अनुभव न होने के कारण…

  • 22nd Dec 2021

    घर का निशां नहीं मिलता!

    चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है,खुद अपने घर में ही घर का निशां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Dec 2021

    सब अपने आप में गुम हैं!

    ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं,ज़बां मिली है मगर हमज़बां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Dec 2021

    मकां नहीं मिलता!

    कहाँ चिराग़ जलायें कहां गुलाब रखें,छतें तो मिलती हैं लेकिन मकां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Dec 2021

    वहां नहीं मिलता!

    तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो,जहाँ उमीद हो इसकी वहां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Dec 2021

    धुआं नहीं मिलता!

    बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले,ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Dec 2021

    नहीं मिलता!

    कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली

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