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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Dec 2021

    ‘यदि’ – रुड्यार्ड किप्लिंग की कविता

    आज फिर से एक पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ, जो मेरे द्वारा किया गया एक अनुवाद है| आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा…

  • 24th Dec 2021

    हमें अजायबघर में रख दो!

    हमें अजायबघर में रख दो,बहुत अनूठे हैं हम लोग। शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    खाली घूंटें हैं हम लोग!

    मय-ख़्वारों की हर महफ़िल में,खाली घूंटें हैं हम लोग। शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    मूठें हैं हम लोग!

    क्या कर लेंगी वे तलवारें,जिनकी मूठें हैं हम लोग। शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    खूंटे हैं हम लोग!

    इसे साध लें, उसे बांध लें,सचमुच खूंटे हैं हम लोग। शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    झूठे हैं हम लोग!

    सत्य चुराता नज़रें हमसे,इतने झूठे हैं हम लोग। शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    हम लोग!

    ख़ुद से रूठे हैं हम लोग।टूटे-फूटे हैं हम लोग॥ शेरजंग गर्ग

  • 24th Dec 2021

    बूंद टपकी एक नभ से!

    आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बातचीत के लहजे में सहज भाव से चमत्कारिक बात कह जाते थे| इस कविता में भी, जैसे जब अचानक बारिश होती है, शुरू में एक बूंद से हमें इसकी सूचना मिलती है और फिर तेज…

  • 23rd Dec 2021

    लोग जब ख़ुदा हो जाएं!

    बंदगी हमने छोड़ दी फ़राज़,क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएं| अहमद फराज़

  • 23rd Dec 2021

    ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएं!

    अब के गर तू मिले तो हम तुझसे,ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएं| अहमद फराज़

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