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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Dec 2021

    वो नशेमन बना दें!

    कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाये,वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 26th Dec 2021

    ख़ुदा को भुला दें!

    अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 26th Dec 2021

    ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें!

    हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 26th Dec 2021

    हम उनके लिए–

    अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 26th Dec 2021

    ठंडा लोहा – धर्मवीर भारती

    एक बार फिर से आज मैं स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| धर्मवीर भारती जी हिन्दी के श्रेष्ठ उपन्यास एवं कहानी लेखक, निबंध लेखक, कवि और गीतकार के अलावा धर्मयुग के जाने-माने संपादक थे| आज मैं भारती जी की एक प्रसिद्ध रचना ‘ठंडा लोहा’ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज…

  • 25th Dec 2021

    जंग टलती है तो बेहतर है !

    इसलिए ऐ शरीफ इंसानों ,जंग टलती है तो बेहतर है !आप और हम सभी के आंगन में ,शमा जलती रहे तो बेहतर है ! साहिर लुधियानवी

  • 25th Dec 2021

    युद्ध-4

    जंग तो खुद ही एक मसअला है,जंग क्या मसअलों का हल देगी ?आग और खून आज बख्शेगी,भूख और एहतयाज कल देगी ! साहिर लुधियानवी

  • 25th Dec 2021

    युद्ध – 3

    टैंक आगे बढे कि पीछे हटें,कोख धरती की बांझ होती है !फतह का जश्न हो कि हार का सोग,जिंदगी मय्यतों पे रोती है ! साहिर लुधियानवी

  • 25th Dec 2021

    युद्ध – 2

    बम घरों पर गिरे कि सरहद पर ,रूह-ऐ-तामीर जख्म खाती है !खेत अपने जले कि औरों के ,जीस्त फ़ाकों से तिलमिलाती है ! साहिर लुधियानवी

  • 25th Dec 2021

    युद्ध-1

    खून अपना हो या पराया होनस्ल-ए-आदम का खून है आख़िर,जंग मशरिक में हो या मगरिब में ,अमन-ऐ-आलम का खून है आख़िर ! साहिर लुधियानवी

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