-
ख़ुदा को भुला दें!
अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें| सुदर्शन फ़ाकिर
-
ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें!
हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर
-
ठंडा लोहा – धर्मवीर भारती
एक बार फिर से आज मैं स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| धर्मवीर भारती जी हिन्दी के श्रेष्ठ उपन्यास एवं कहानी लेखक, निबंध लेखक, कवि और गीतकार के अलावा धर्मयुग के जाने-माने संपादक थे| आज मैं भारती जी की एक प्रसिद्ध रचना ‘ठंडा लोहा’ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज…
-
जंग टलती है तो बेहतर है !
इसलिए ऐ शरीफ इंसानों ,जंग टलती है तो बेहतर है !आप और हम सभी के आंगन में ,शमा जलती रहे तो बेहतर है ! साहिर लुधियानवी
-
युद्ध-4
जंग तो खुद ही एक मसअला है,जंग क्या मसअलों का हल देगी ?आग और खून आज बख्शेगी,भूख और एहतयाज कल देगी ! साहिर लुधियानवी
-
युद्ध – 3
टैंक आगे बढे कि पीछे हटें,कोख धरती की बांझ होती है !फतह का जश्न हो कि हार का सोग,जिंदगी मय्यतों पे रोती है ! साहिर लुधियानवी
-
युद्ध – 2
बम घरों पर गिरे कि सरहद पर ,रूह-ऐ-तामीर जख्म खाती है !खेत अपने जले कि औरों के ,जीस्त फ़ाकों से तिलमिलाती है ! साहिर लुधियानवी
-
युद्ध-1
खून अपना हो या पराया होनस्ल-ए-आदम का खून है आख़िर,जंग मशरिक में हो या मगरिब में ,अमन-ऐ-आलम का खून है आख़िर ! साहिर लुधियानवी