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प्रचलन बदला शहर हुआ!
धीरे-धीरे हर बस्ती का, प्रचलन बदला शहर हुआ,सूट-बूट हर वन मानुष ने, धीरे-धीरे डाट लिए| सूर्यभानु गुप्त
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जब अपनी प्यास के–
जब अपनी प्यास के सहरा से डर गया हूँ मैं,नदी में बांध के पत्थर उतर गया हूँ मैं| सूर्यभानु गुप्त
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जाने न नज़र पहचाने जिगर!
एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर साहब की फिल्म ‘आह’ के लिए लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी ने| लीजिए…
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कोई फ़ैसला तो सुना दें!
सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें,मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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चेहरे से पर्दा हटा दें!
क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,चलो उनके चेहरे से पर्दा हटा दें| सुदर्शन फ़ाकिर