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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Dec 2021

    हाथ में पत्थर उठा लिए!

    दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए,सारे जहां ने हाथ में पत्थर उठा लिए| कुंवर बेचैन

  • 29th Dec 2021

    आ अब लौट चलें!

    आज फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर जी की अद्वितीय फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के लिए लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की…

  • 28th Dec 2021

    एक इशारा दिन

    अक़्लमंद को काफ़ी है,साहब! एक इशारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    बंजारा दिन!

    बांधे बंधा न दुनिया के,जन्मों का बंजारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    रहा कुँवारा दिन!

    रिश्ते आकर लौट गए,हम-सा रहा कुँवारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    इकतारा दिन!

    चेहरा-चेहरा राम-भजन,जोगी का इकतारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    उतारा दिन!

    उम्मीदों ने टाई-सा,देखी शाम, उतारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    आरा-आरा दिन!

    पेड़ों जैसे लोग कटे,गुज़रा आरा-आरा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 28th Dec 2021

    प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो!

    आज फिर से मैं, मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत फिल्म ‘फिल्म-होली आई रे’ के लिए लिखा था क़मर जलालाबादी साहब ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था कल्याणजी-आनंदजी की प्रसिद्ध जोड़ी ने| लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी…

  • 27th Dec 2021

    आवाज़ों का पारा दिन!

    थर्मामीटर कानों के,आवाज़ों का पारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

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