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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Dec 2021

    तेरी तस्वीर लगा कर देखूं!

    दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता हैसोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूं | राहत इन्दौरी

  • 30th Dec 2021

    अगर होश में आकर देखूं!

    मैने देखा है ज़माने को शराबें पी करदम निकल जाये अगर होश में आकर देखूं | राहत इन्दौरी

  • 30th Dec 2021

    और तुझे तेरी निगाहों से–

    कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत मेंऔर तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूं | राहत इन्दौरी

  • 30th Dec 2021

    हाथ लगा कर देखूं !

    मोम के पास कभी आग को लाकर देखूंसोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं | राहत इन्दौरी

  • 30th Dec 2021

    गीत-विहग उतरा!

    आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत रंजक जी की प्रारंभिक प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है और यह उनके एक नवगीत संकलन का शीर्षक गीत था| प्रकृति के कुछ सुंदर चित्र इस गीत में उकेरे गए हैं|| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 29th Dec 2021

    वो खत जो तुम्हें दे न सके–

    अब भी किसी दराज में मिल जाएंगे तुम्हें,वो खत जो तुम्हें दे न सके लिख लिखा लिए। कुंवर बेचैन

  • 29th Dec 2021

    जब हो सकी न बात!

    जब हो सकी न बात तो हमने यही किया,अपनी ग़ज़ल के शेर कहीं गुनगुना लिए| कुंवर बेचैन

  • 29th Dec 2021

    आग में बादल नहा लिए!

    सुख, जैसे बादलों में नहाती हों बिजलियां,दुख, बिजलियों की आग में बादल नहा लिए| कुंवर बेचैन

  • 29th Dec 2021

    कांटे चुभा लिए!

    चाहा था एक फूल ने तड़पे उसी के पास,हमने खुशी के पाँवों में कांटे चुभा लिए| कुंवर बेचैन

  • 29th Dec 2021

    सपने चुरा लिए!

    रहते हमारे पास तो ये टूटते जरूर,अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए| कुंवर बेचैन

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