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भ्रमण पिपासा – गेराल्ड गॉल्ड
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर करने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट| भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है।जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता ‘Wander thirst‘ याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही…
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फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम!
एक हम ही नहीं फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम,उन के खामोश लबों पर भी फसाने से मिले| कैफ़ भोपाली
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कुछ यार पुराने से मिले!
इक नया जख़्म मिला एक नई उम्र मिली,जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले| कैफ़ भोपाली
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इसी हीले बहाने से मिले!
कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए,हम हसीनों से इसी हीले बहाने से मिले| कैफ़ भोपाली
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ये दो वक्त सुहाने से मिले!
मां की आगोश में कल मौत की आगोश में आज,हम को दुनिया में ये दो वक्त सुहाने से मिले| कैफ़ भोपाली