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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Jan 2022

    उस शख़्स को भुलाए कौन!

    अब सुकूं है तो भूलने में है,लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन| जावेद अख़्तर

  • 6th Jan 2022

    आज़माए कौन!

    वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं,कौन दुख झेले आज़माए कौन| जावेद अख़्तर

  • 6th Jan 2022

    ग़म अभी सोया है!

    कौन दोहराए वो पुरानी बात,ग़म अभी सोया है जगाए कौन| जावेद अख़्तर

  • 6th Jan 2022

    सुनाए कौन!

    दर्द अपनाता है पराए कौन,कौन सुनता है और सुनाए कौन| जावेद अख़्तर

  • 6th Jan 2022

    भ्रमण पिपासा – गेराल्ड गॉल्ड

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर करने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट| भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है।जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता ‘Wander thirst‘ याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही…

  • 5th Jan 2022

    फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम!

    एक हम ही नहीं फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम,उन के खामोश लबों पर भी फसाने से मिले| कैफ़ भोपाली

  • 5th Jan 2022

    कुछ यार पुराने से मिले!

    इक नया जख़्म मिला एक नई उम्र मिली,जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले| कैफ़ भोपाली

  • 5th Jan 2022

    इसी हीले बहाने से मिले!

    कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए,हम हसीनों से इसी हीले बहाने से मिले| कैफ़ भोपाली

  • 5th Jan 2022

    ये दो वक्त सुहाने से मिले!

    मां की आगोश में कल मौत की आगोश में आज,हम को दुनिया में ये दो वक्त सुहाने से मिले| कैफ़ भोपाली

  • 5th Jan 2022

    लोगों के मिलाने से मिले!

    ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता,क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले| कैफ़ भोपाली

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