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नसीब अपना बना ले मुझको!
अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,मैं हूँ तेरा नसीब अपना बना ले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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सपना है अभी भी!
हिन्दी साहित्य की प्रत्येक विधा में अद्वितीय लेखन करने वाले, भले ही वह उपन्यास, कहानी और निबंध लेखन हो तथा हिन्दी कविता के गीत, नवगीत और अगीत सभी क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने वाले और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज उनकी…
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कारवाँ गुज़र गया!
आज बिना किसी भूमिका के, श्रेष्ठ कवि और गीतों के राजकुमार कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ| एक ऐसा गीत जो नीरज जी की पहचान बना और उनसे अक्सर कवि सम्मेलनों में यह गीत प्रस्तुत करने का अनुरोध किया जाता था| इस गीत का कुछ अंश…