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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Sep 2022

    जब बे-ख़ुदी से मिलता है!

    कारोबार-ए-जहाँ सँवरते हैं, होश जब बे-ख़ुदी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी

  • 12th Sep 2022

    दिल उसी से मिलता है!

    मिल के भी जो कभी नहीं मिलता, टूट कर दिल उसी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी

  • 12th Sep 2022

    रंग तेरी हँसी से मिलता है!

    आज क्या बात है कि फूलों का, रंग तेरी हँसी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी

  • 12th Sep 2022

    भूल जाता हूँ मैं सितम उसके!

    भूल जाता हूँ मैं सितम उसके, वो कुछ इस सादगी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी

  • 12th Sep 2022

    आदमी आदमी से मिलता है!

    आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है| जिगर मुरादाबादी

  • 12th Sep 2022

    दिल भी जलाया मैंने!!

    आज मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, यह  गीत उन्होंने फिल्म- ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र जी  के लिए गाया है, संगीतकार हैं- कल्याणजी आनंदजी, जो उन संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने मुकेश जी की अनूठी आवाज़ का भरपूर इस्तेमाल किया है। इसके गीतकार हैं- शमीम जयपुरी।…

  • 11th Sep 2022

    शीशे के मकाँ कैसे हैं!

    पत्थरों वाले वो इंसान वो बेहिस दर-ओ-बाम, वो मकीं कैसे हैं शीशे के मकाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा

  • 11th Sep 2022

    मिरे पैरों के निशाँ कैसे हैं!

    ऐ सबा तू तो उधर ही से गुज़रती होगी, उस गली में मिरे पैरों के निशाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा

  • 11th Sep 2022

    ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं!

    जिनसे हम छूट गए अब वो जहाँ कैसे हैं, शाख़-ए-गुल कैसी है ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं| राही मासूम रज़ा

  • 11th Sep 2022

    मिरे प्यार ने सुलझाए हैं!

    ज़िंदगी ढूँढ ले तू भी किसी दीवाने को, उसके गेसू तो मिरे प्यार ने सुलझाए हैं| राही मासूम रज़ा

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