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चुलबुली किरण!
आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीत कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, रंजक जी हिन्दी नवगीत साहित्य की ऐसी अदभुद प्रतिभा थे जिन्होंने और भी बहुत से रचनाकारों को नवगीत लिखने के लिए प्रेरित किया| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत…
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मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है!
सूनी दुनिया में अब तो मैं हूँ और, मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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बूँद में भी वो बे-करानी है!
बहर-ए-हस्ती भी जिसमें खो जाए, बूँद में भी वो बे-करानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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ज़िंदगी हिज्र की कहानी है!
मुझसे कहता था कल फ़रिश्ता-ए-इश्क़, ज़िंदगी हिज्र की कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी