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वसंत श्री!
आज मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की वसंत ऋतु पर लिखी यह कविता – उस फैली हरियाली में,कौन अकेली खेल रही मा!वह अपनी वय-बाली में?सजा…
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‘फ़राज़’ तुम भी अगर
तवाफ़-ए-मंज़िल-ए-जानाँ हमें भी करना है, ‘फ़राज़’ तुम भी अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़