Category: Uncategorized
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नया रास्ता निकल आया!
सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया, भटक गया तो नया रास्ता निकल आया| राजेश रेड्डी
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कहाँ है लेकिन मेरे जैसा और!
औरों जैसे और न जाने कितने हैं, कोई कहाँ है लेकिन मेरे जैसा और| राजेश रेड्डी
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मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और!
अजब मुसाफ़िर हूँ मैं मेरा सफ़र अजीब, मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और| राजेश रेड्डी
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ख़ुश होना तो दूर रहा!
सच कहने पर ख़ुश होना तो दूर रहा, किया ज़माने ने मुझ को शर्मिंदा और| राजेश रेड्डी
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अंत नहीं मन के सूने-पन का!
कोई अंत नहीं मन के सूने-पन का, सन्नाटे के पार है इक सन्नाटा और| राजेश रेड्डी
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मुझ में जाने क्या क्या और!
दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और, छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और| राजेश रेड्डी
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मंगल-आह्वान
आज ओज और शृंगार दोनों प्रकार की रचनाओं के माध्यम से अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में दिनकर जी ने यह प्रार्थना की है कि उनको ऐसी शक्ति और ऐसा स्वर प्राप्त हो कि वे हर प्रकार के भाव, हर वेदना…
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अमृत पी के अमर हो जाएँगे!
ज़मज़म और गंगा-जल पीकर कौन बचा है मरने से, हम तो आँसू का ये अमृत पी के अमर हो जाएँगे| राही मासूम रज़ा
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तन्हाई से कब लोग रिहाई पाएँगे!
परछाईं के इस जंगल में क्या कोई मौजूद नहीं, इस दश्त-ए-तन्हाई से कब लोग रिहाई पाएँगे| राही मासूम रज़ा