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पहली बूंद!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और नवगीतकार स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी अधिक रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी की यह रचना – यह बादल की पहली बूँद कि यह वर्षा का पहला चुम्बनस्मृतियों के शीतल…
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बाज़ार में खो जाते हैं!
हम कुछ ऐसे तिरे दीदार में खो जाते हैं, जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं| मुनव्वर राना
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लड़की सियानी और है!
बस इसी एहसास की शिद्दत ने बूढ़ा कर दिया, टूटे-फूटे घर में इक लड़की सियानी और है| मुनव्वर राना
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थोड़ी सी जवानी और है
फिर वही उक्ताहटें होंगी बदन चौपाल में, उम्र के क़िस्से में थोड़ी सी जवानी और है| मुनव्वर राना
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बाग़बानी और है!
ख़ुश्क पत्ते आँख में चुभते हैं काँटों की तरह, दश्त में फिरना अलग है बाग़बानी और है| मुनव्वर राना
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ये बे-ज़बानी और है!
ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है, ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है| मुनव्वर राना
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मज़हबी मज़दूर सब!
मज़हबी मज़दूर सब बैठे हैं इनको काम दो, एक इमारत शहर में काफ़ी पुरानी और है| मुनव्वर राना
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पालोलिम, कोला बीच!
मैं यह बताना चाहूँगा कि पिछले सप्ताह गोवा में ही पालोलिम बीच जाने का प्रोग्राम तीसरी बार बन गया| बड़ा बेटा लंदन से आया हुआ है सो उसके लिए कम समय में भारत के अधिक सुंदर और महत्वपूर्ण स्थानों को फिर से देख लेना महत्वपूर्ण है| ‘पालोलिम बीच’ हम पहले भी दो बार उसके साथ…