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ठोकरें यूँ खिलाने से!
दी सदा दार पर और कभी तूर पर किस जगह मैं ने तुम को पुकारा नहीं,ठोकरें यूँ खिलाने से क्या फ़ाएदा साफ़ कह दो कि मिलना गवारा नहीं| क़मर जलालवी
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उम्र भर का सहारा !
आज आए हो तुम कल चले जाओगे ये मोहब्बत को अपनी गवारा नहीं,उम्र भर का सहारा बनो तो बनो दो घड़ी का सहारा सहारा नहीं| क़मर जलालवी
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बहेलिए!
आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- धागे तो कच्चे हैं, मनमोहक नारों के,लेकिन जब जाल बुने जाते हैं यारों के,और ये शिकारी, डालते हैं दाना,हर रोज़ नए वादों का,भाग्य बदल देने केजादुई इरादों का,फंसती है भोले कबूतर सी जनता तब,जाल समेट, राजनैतिक बहेलिएबांधते हैं, जन-गण की उड़ाने…
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अपना गुज़ारा नहीं!
ऐ मिरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं, बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नहीं| क़मर जलालवी
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चल गई -हास्य कविता!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं शैल चतुर्वेदी जी की प्रसिद्ध हास्य कविता ‘चल गई’ का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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बाल समय रवि भक्ष लियो !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में ‘संकट मोचन हनुमान अष्टक’ का पाठ प्रस्तुत कर रहा हूँ- बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******