Category: Uncategorized
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उतना तुम पर विश्वास बढ़ा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। अंचल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी का आस्था से भरा यह गीत – बाहर के आँधी पानी से मन का तूफ़ान कहीं बढ़ कर,बाहर के…
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और सहर पैदा कर!
सुब्ह-ए-फ़ुर्क़त तो क़यामत की सहर है या रब,अपने बंदों के लिए और सहर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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मेरी नज़र पैदा कर!
आईना देखना इस हुस्न पे आसान नहीं,पेश-तर आँख मिरी मेरी नज़र पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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बातों में असर पैदा!
झूट जब बोलते हैं वो तो दुआ होती है,या इलाही मिरी बातों में असर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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थम ज़रा ऐ अदम!
थम ज़रा ऐ अदम-आबाद के जाने वाले,रह के दुनिया में अभी ज़ाद-ए-सफ़र पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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और जिगर पैदा कर!
काम लेने हैं मोहब्बत में बहुत से या रब,और दिल दे हमें इक और जिगर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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पहले तू अपना दहन!
फिर हमारा दिल-ए-गुम-गश्ता भी मिल जाएगा,पहले तू अपना दहन अपनी कमर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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असर पैदा कर!
दूद-ए-दिल इश्क़ में इतना तो असर पैदा कर,सर कटे शम्अ की मानिंद तो सर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
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ये नहीं है सही वक़्त!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजकुमार कुंभज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। कुंभज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आप अज्ञेय जी द्वारा संपादित चौथा सप्तक में सम्मिलित थे। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजकुमार कुंभज जी की यह कविता – एक खिलाबुझ गया दूसरा उसी वक़्तसही…
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जो इधर दिल में है !
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर,जो इधर दिल में है या रब वो उधर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी