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ज़िंदगी की कहानी!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी का यह गीत – ज़िंदगी की कहानी रही अनकही ! दिन गुज़रते रहे, साँस चलती रही ! अर्थ क्या ? शब्द ही अनमने…
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मुद्दत के बा’द ‘नूर’!
मुद्दत के बा’द ‘नूर’ हँसी लब पे आई है,वो अपना हम-ख़याल बना ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर
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बहा ले गया मुझे!
तूफ़ाँ के बा’द मैं भी बहुत टूट सा गया,दरिया फिर अपने रुख़ पे बहा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर
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झोंका हवा का आया!
धरती का ये सफ़र मिरा जिस दिन हुआ तमाम,झोंका हवा का आया उड़ा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर
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उतारी जाए!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की एक कवि ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ। विराट जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की ये ग़ज़ल – अब हथेली न पसारी जाए.धार पर्वत से उतारी जाए. अपनी जेबो में भरे जो पानीउसकी…