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मिटे ये शुबह तो!
मिटे ये शुबह तो ए दोस्त तुझ से बात करें,हमारी पहली मुलाक़ात आख़िरी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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हज़ार ग़म सही!
हज़ार ग़म सही दिल में मगर ख़ुशी ये है,हमारे होंटों पे माँगी हुई हँसी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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कुछ कमी तो नहीं!
जबीं को दर पे झुकाना ही बंदगी तो नहीं,ये देख मेरी मोहब्बत में कुछ कमी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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हयात देती हैं साँसें!
हयात देती हैं साँसें बस इक मक़ाम तलक,फिर इस के बा’द तो बस साँस साँस मरते हैं| कृष्ण बिहारी नूर
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ये चाँद तारे ज़मीं!
ये चाँद तारे ज़मीं और आफ़्ताब तमाम,तवाफ़* करते हैं किस का तवाफ़ करते हैं?*परिक्रमा कृष्ण बिहारी नूर
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कि जिस्म जलता है!
ये किस ने खींच दी साँसों की लक्ष्मण-रेखा,कि जिस्म जलता है बाहर जो पाँव धरते हैं| कृष्ण बिहारी नूर
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सौ-सौ प्रतीक्षित पल गए!
आज एक बार फिर मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह नवगीत- सौ-सौ प्रतीक्षित पल गएसारे भरोसे छल गएकिरणें हमारे गाँव मेंख़ुशियाँ नहीं लाईं…
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इक तीर सा दिल में!
क्या शय थी किसी की पहली नज़र कुछ इस के अलावा याद नहीं,इक तीर सा दिल में जैसे लगा पैवस्त हुआ और टूट गया। शमीम जयपुरी