Category: Uncategorized
-
शायद मिले किनारा!
आवाज़ दे रही है ये किस की नज़र मुझे,शायद मिले किनारा वहीं डूब कर मुझे| क़मर जलालाबादी
-
तबीअ’त की बात है!
मैं ने कहा कभी है सितम और कभी करम,कहने लगे कि ये तो तबीअ’त की बात है| क़मर जलालाबादी
-
तिजारत की बात है!
मैं ने कहा कि देते हैं दिल तुम भी लाओ दिल,कहने लगे कि ये तो तिजारत की बात है| क़मर जलालाबादी
-
हर बात पर ख़फ़ा!
मैं ने कहा कि रहते हो हर बात पर ख़फ़ा,कहने लगे हुज़ूर ये क़ुर्बत* की बात है| *निकटता क़मर जलालाबादी
-
एक वक़्त की रोटी खाते!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि एवं राजनेता श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ। उदयप्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह ग़ज़ल – एक वक़्त की रोटी खाते आधे हिन्दुस्तानी लोगकाले धन पर फिर कैसे इतराते…
-
क़िस्मत की बात है!
मैं ने कहा की मिल के भी हम क्यूँ न मिल सके, कहने लगे हुज़ूर ये क़िस्मत की बात है| क़मर जलालाबादी
-
ये फ़ुर्सत की बात है!
मैं ने कहा कि आए हो कितने दिनों के बा’द,कहने लगे हुज़ूर ये फ़ुर्सत की बात है| क़मर जलालाबादी
-
हज़ारों साल बीते हैं!
हज़ारों साल बीते हैं हज़ारों साल बीतेंगे,बदल जाएगी कल तक़दीर-ए-इंसाँ हम नहीं कहते| जाँ निसार अख़्तर
-
गरेबाँ हम नहीं कहते!
बहारों से जुनूँ को हर तरह निस्बत सही लेकिन,शगुफ़्त-ए-गुल को आशिक़ का गरेबाँ हम नहीं कहते| जाँ निसार अख़्तर