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इन्हें प्रणाम करो ये -2
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की प्रसिद्ध व्यंग्य कविता का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं-2 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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जो हवा में घर बनाए!
जो हवा में घर बनाए काश कोई देखता,दश्त में रहते थे पर ता’मीर की आदत भी थी| मुनीर नियाज़ी
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फूल थे बादल भी था !
फूल थे बादल भी था और वो हसीं सूरत भी थी,दिल में लेकिन और ही इक शक्ल की हसरत भी थी| मुनीर नियाज़ी
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दीवाना मुझसा नहीं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- तीसरी मंज़िल के लिए मोहम्मद रफी जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हुन जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और राहुल देव बर्मन जी ने इसका संगीत दिया थ, यह गीत शम्मी कपूर जी पर फिल्माया गया था- दीवाना मुझसा नहीं,…
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अपनी सूली अपने काँधे!
क्यूँ शरीक-ए-ग़म बनाते हो किसी को ऐ ‘क़तील’,अपनी सूली अपने काँधे पर उठाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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हफ़्तों उनसे मिले हो गए!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हास्य कवि स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अल्हड़ जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की यह हास्य ग़ज़ल – हफ़्तों उनसे मिले हो गए,विरह में पिलपिले हो गए। सदके जूड़ों…
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देख लेना घर से!
देख लेना घर से निकलेगा न हम-साया कोई, ऐ मिरे यारो मिरे दर्द-आश्नाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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इन्हें प्रणाम करो ये -1
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की व्यंग्य कविता क पहला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं-1 आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *******
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वक़्त से पहले अँधेरे में!
छट गए हालात के बादल तो देखा जाएगा,वक़्त से पहले अँधेरे में न जाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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ये रात ये चांदनी फिर कहाँ!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- जाल का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे हेमंत कुमार जी ने गाया था- ये रात ये चांदनी फिर कहाँ, सुन जा दिल की दास्तां! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ********