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ये मुलाकातें!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता – बीच-बीच कीये मुलाक़ातेंमेरी उम्र के पन्नों पर ऐसे ही सजी हैंजैसे बच्चे अपनी पोथी…
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नए कपड़े बदल कर!
नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए, वो शख़्स तो शहर ही छोड़ गया मैं बाहर जाऊँ किस के लिए| नासिर काज़मी
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चराग़ याद का!
गली के मोड़ से घर तक अँधेरा क्यूँ है ‘निज़ाम’,चराग़ याद का उस ने बुझा दिया होगा| शीन काफ़ निज़ाम