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नए पैरहन के साथ!
दुश्मन की दोस्ती है अब अहल-ए-वतन के साथ,है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के साथ| मजरूह सुल्तानपुरी
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मैं हूँ।
आज मैं हिंदी नवगीत के सुप्रसिद्ध हस्ताक्षर स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत – आसपासजंगली हवाएँ हैं,मैं हूँ । पोर-पोरजलती समिधाएँ हैंमैं हूँ । आड़े-तिरछेलगावबनते आते, स्वभावसिर धुनतीहोंठ की…