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सौदा जो करना!
पिछले जन्म की गाढ़ी कमाई है ज़िंदगी,सौदा जो करना करना बहुत देख-भाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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ऐ मेरी आरज़ू मुझे!
ऐसा न हो गुनाह की दलदल में जा फँसूँ, ऐ मेरी आरज़ू मुझे ले चल सँभाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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लफ़्ज़ों के ये नगीने!
लफ़्ज़ों के ये नगीने तो निकले कमाल के,ग़ज़लों ने ख़ुद पहन लिए ज़ेवर ख़याल के| कृष्ण बिहारी नूर
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मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ!
गर्द-ए-राह की सूरत साँस साँस है ऐ ‘नूर’,मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ क़ाफ़िला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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होता है रोज आत्मदाह
यू ट्यूब पर – मेरा नया गीतहोता है रोज आत्मदाह https://youtu.be/vzr1B7_R-Z4?si=-ufQqbPkSIErZTWmआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा।
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चेहरा चेहरा पढ़ लीजे!
अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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हौसला है ख़्वाबों का!
देखें इस कशाकश का इख़्तिताम हो कब तक,जागने की ख़्वाहिश है हौसला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
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दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। शमशेर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह रचना – दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !बस अब ख़ुदा की जात अकेली है, और…
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एक शब के टुकड़ों के!
एक शब के टुकड़ों के नाम मुख़्तलिफ़ रखे, जिस्म-ओ-रूह का बंधन सिलसिला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर