Category: Uncategorized
-
कहाँ की गर्द हवा!
सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह,चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा| क़ैसर शमीम
-
मौसम तो बदलते हैं!
मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा,ऐ दोस्त हमारे आँगन में रहती है हमेशा ज़र्द हवा| क़ैसर शमीम
-
यूट्यूब पर नया गीत
आज अपने एक और गीत का वीडिओ अपने यूट्यूब चैनल से आपके साथ शेयर कर रहा हूँ- शब्दों के पिरामिड सजाओगे-https://youtu.be/0E7psKJzVpY?si=QMDeaZ8M7RNo-KFWआशा है आपको पसंद आएगा।मेर यह भी अनुरोध है कि आप मेरे यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब करें।धन्यवाद्।
-
दीवार गिरा दे कोई!
दूसरी सम्त हैं ख़ुशबू के उफ़ुक़ की सुब्हें,रंग के कोहरे की दीवार गिरा दे कोई। नज़ीर क़ैसर
-
गीत- भोजन पांच सितारा स्थल में!
आज प्रस्तुत है हल्के-फुल्के मूड में लिखा गया एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- भोजन पांच सितारा स्थल में! कुछ थे अतिथि खानदानी सेमौका पाकर रौब दिखातेकुछ थे वहाँ मेहरबानी सेपूर्ण सहज वे कब हो पाते सबका संगम, दावत गृह में, खाना मूल वही होता परकितने नए नाम-रूपों मेंयुवक-युवतियां वहाँ सजाते सभी खाद्य निश्चित…
-
यूँ तुझे देख के!
यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें,जैसे सन्नाटे में आवाज़ लगा दे कोई। नज़ीर क़ैसर
-
तस्वीर बना दे कोई!
दिल की तख़्ती सर-ए-बाज़ार लिए फिरता हूँ,काश इस पर तिरी तस्वीर बना दे कोई। नज़ीर क़ैसर
-
बातें दिल की कौन सुनेगा!
आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बातें दिल की कौन सुनेगाहै यह बौद्धिक जन की बस्ती! दिल की बातें करने वालेलुटते जाते, पिटते जातेबहुधा अपमानित होकर भीरहते गीत प्रेम के गाते, छोडो ये झंझट अतीत केसीखो नई प्रक्रिया सस्ती। यहाँ बुद्धि व्यवहार चलेगा भावुकता को दूर भगाओजो गाने दुनिया गाती हैतुम…
-
ढूँढता फिरता हूँ!
ढूँढता फिरता हूँ यूँ अपने ही क़दमों के निशाँजैसे मुझ को मिरी नज़रों से छुपा दे कोई। नज़ीर क़ैसर