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सब मज़लूम हैं!
जिस की तेग़ है दुनिया उस की जिस की लाठी उस की भैंस,सब क़ातिल हैं सब मक़्तूल हैं सब मज़लूम हैं ज़ालिम सब| अली सरदार जाफ़री
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शहीद वंदना- यूट्यूब चैनल पर
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक और अत्यंत श्रेष्ठ रचना शेयर कर रहा हूँ। आज की रचना है – शहीद वंदना और इसकी रचनाकार हैं स्वर्गीया इंदुमति कौशिक जीhttps://youtu.be/DzEXKReyEhI प्रस्तुत है यह रचना मेरे स्वर में यूट्यूब चैनल पर आशा है आपको पसंद आएगीधन्यवाद।
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दिल की दीवारें!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- ये दिल की कच्ची दीवारेंकितने धक्के खाती हैं। यदि तुम करते रहे भरोसावही मिलेगा धोखा-धोखाप्रेम करो तो प्रेम मिलेगायह है सबसे बडा शिगूफा,यह प्रक्रिया नहीं रुकती हैऋतुएं आती-जाती हैं। शायद प्रेम वही शाश्वत हैजो हम प्रभु से करते हैं, बाकी रंग सभी कच्चे हैंचढ़ते…
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राम-ओ-कृष्ण-ओ!
वेद उपनिषद पुर्ज़े पुर्ज़े गीता क़ुरआँ वरक़ वरक़,राम-ओ-कृष्ण-ओ-गौतम-ओ-यज़्दाँ ज़ख़्म-रसीदा सब के सब| अली सरदार जाफ़री
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इंसाँ इंसाँ बनेगा कब!
वही है वहशत, वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब,इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है इंसाँ इंसाँ बनेगा कब| अली सरदार जाफ़री
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फाँसियाँ उगती रहीं!
फाँसियाँ उगती रहीं ज़िंदाँ उभरते ही रहे,चंद दीवाने जुनूँ के ज़मज़मे गाते रहे| अली सरदार जाफ़री
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आरिज़ पे लहराते रहे!
जिस क़दर बढ़ता गया ज़ालिम हवाओं का ख़रोश,उस के काकुल* और भी आरिज़ पे लहराते रहे|*ज़ुल्फ की लट अली सरदार जाफ़री
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रहबरों की भूल थी!
रहबरों की भूल थी या रहबरी का मुद्दआ’,क़ाफ़िलों को मंज़िलों के पास भटकाते रहे| अली सरदार जाफ़री
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शहरयार-ओ-हुक्मराँ!
कारवान-ए-हिम्मत-ए-जम्हूर बढ़ता ही गया,शहरयार-ओ-हुक्मराँ आते रहे जाते रहे| अली सरदार जाफ़री