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जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना!
आप सभी को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। नीरज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत – जलाओ दिए पर रहे ध्यान…
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बुतों को देख के!
बुतों को देख के सब ने ख़ुदा को पहचाना,ख़ुदा के घर तो कोई बंदा-ए-ख़ुदा न गया| यगाना चंगेज़ी
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कि मुझ को ले के!
करूँ तो किस से करूँ दर्द-ए-ना-रसा का गिला,कि मुझ को ले के दिल-ए-दोस्त में समा न गया| यगाना चंगेज़ी
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ख़ुदा थे इतने मगर!
पुकारता रहा किस किस को डूबने वाला,ख़ुदा थे इतने मगर कोई आड़े आ न गया| यगाना चंगेज़ी
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किसी पे हँस लिए!
गुनाह-ए-ज़िंदा-दिली कहिए या दिल-आज़ारी,किसी पे हँस लिए इतना कि फिर हँसा न गया| यगाना चंगेज़ी
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ख़ुदी का नश्शा चढ़ा
ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया,ख़ुदा बने थे ‘यगाना’ मगर बना न गया| यगाना चंगेज़ी
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सरापा राज़ हूँ मैं!
सरापा राज़ हूँ मैं क्या बताऊँ कौन हूँ क्या हूँ,समझता हूँ मगर दुनिया को समझाना नहीं आता| यगाना चंगेज़ी
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वो आँसू क्या पिएगा!
दिल-ए-बे-हौसला है इक ज़रा सी ठेस का मेहमाँ,वो आँसू क्या पिएगा जिस को ग़म खाना नहीं आता| यगाना चंगेज़ी
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जितनी दूर नयन से सपना!
आज मैं एक बार फिर अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक श्रेष्ठ साहित्यिक गीत शेयर कर रहा हूँ।आज का गीत मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का है और मुझे बहुत प्रिय है।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह गीत मेरे स्वर में-जितनी दूर नयन से सपना, जितनी…
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एक नाम अधरों पर आया!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – एक नाम अधरों पर आया,अंग-अंग चंदन वन हो गया. बोल है कि वेद की ऋचायेंसांसों में…