Category: Uncategorized
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205. तू अपनी एक ठोकर में सौ इंक़लाब लेकर चल!
Three Day Quote Challenge हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिए कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं| विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं – स्वामी विवेकानंद थ्री डे चैलेंज के अंतर्गत ब्लॉग पोस्ट लिखने का आज दूसरा दिन है। शुरू…
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203. जो एक सपना अपनाए!
Three Day Quote Challenge छोटे सपने देखना अपराध है- प्रो. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम मुझे साथी ब्लॉगर अनामिका जी ने Three Day Quote Challenge के लिए नामित किया है, मैं अनामिका जी का आभारी हूँ और यह चुनौती स्वीकार करता हूँ। अनामिका जी बहुत सुंदर ब्लॉग लिखती हैं, जिनको https://anamikaisblogging.wordpress.com पर देखा जा सकता है। मैं चाहूंगा…
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203. चराग़ों को जलाने में जला ली उंगलियाँ हमने!
आज इंसान की ज़िंदगी में जहाँ साधन संपन्नता बढ़ती जा रही है, वहीं प्रतियोगिता भी बढ़ रही है, जो साइकिल पर है उसे स्कूटर, मोटरसाइकिल की ललक है, जो इन पर उसका ध्यान कार पर टिका है और कार लेने के बाद मेरे भाई कोई एक मॉडल थोड़े ही है, ये मॉडल तो कुछ लाख…
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68. हाय रे हाय ओ दुनिया हम तेरी नज़र में आवारे!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- मैं नशे में हूँ, यह गीत राज कपूर पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो चांद…
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67. इसलिए धर्म को प्यार बना!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग, इसमें जिस बाबा की बात की गई है, असल में उसके बाद एक और बाबा को सज़ा हो चुकी है – एक बाबा को सज़ा का ऐलान होने वाला है। अच्छा नहीं लगता कि बाबाओं को इस हालत से गुज़रना पड़े। हमारे देश में परंपरा रही…
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66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!
आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा। एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी थे- राना सहरी, जो उस समय लिखना शुरू कर रहे थे, बाद में उनकी लिखी कुछ गज़लें जगजीत सिंह जी ने भी गाईं, उनमें से ही एक को याद कर रहा हूँ।…
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65. चंदू के चाचा, चांद पर!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज भारत के एक महान कैरेक्टर के बारे में बात कर रहा हूँ, जिन्हें अपनी तारीफ एकदम पसंद नहीं है, लेकिन उनमें गुण इतने हैं कि मेरा मन हो रहा है कि आज उनके बारे में बात कर ही लें। आपने यह दृष्टांत तो सुना ही…
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202. हम अपने बुज़ुर्गों का ज़माना नहीं भूले!
आज एक छोटी सी गज़ल सागर आज़मी जी की लिखी हुई शेयर करने का मन हो रहा है, जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है। आज जबकि ऐसा माहौल है कि लोग किसी न किसी बहाने से नफरत फैलाने के काम में लगे हैं, इस प्रकार की गज़लें, कविताएं अच्छा संदेश देती हैं। इसमें उन…
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64. आनंदोत्सव!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- मैंने तीन दिनों तक चले श्री श्री रविशंकर जी द्वारा संचालित आनंदोत्सव में भाग लिया। ऐसे शिविर उनकी संस्था- ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा आयोजित किए जाते रहते हैं, लेकिन जैसा मुझे बताया गया, 30 वर्षों के इन शिविरों के इतिहास में यह तीसरी बार था कि…