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63. आस्था के नगीने फक़त कांच हैं
आज सोशल मीडिया के बारे में बात कर लेता हूँ, ये ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि मैं विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को संकलित कर लूं और उसके बाद यदि कभी ऐसा मन बने तो इनमें से कुछ ब्लॉग्स को पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जा सकता है। इनमें यदा-कदा अपनी कविताएं…
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62. वह जो नाव डूबनी है मैं उसी को खे रहा हूँ
जिस प्रकार मौसम पर बात करना बहुत आसान सा काम होता है, टाइम पास वाला काम, अगर आप इसको भी काम कहना चाहें, उसी प्रकार अपने मुहल्ले के बारे में बात करना भी एक अच्छा टाइम-पास होता था, विशेष रूप से महिलाओं के लिए। ये उस समय की बात है, जब मुहल्ले हुआ करते थे,…
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61. अरुण यह मधुमय देश हमारा
आज याद आ रहा है, शायद 27 वर्ष तक, मैं स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर संदेश तैयार किया करता था, ये संदेश होते थे पहले 5 वर्ष (1983 से 1987) हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की इकाइयों (मुसाबनी और खेतड़ी) और बाद में 22 वर्ष तक एनटीपीसी की कुछ इकाइयों के कर्मचारियों के लिए,…
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60. बच्चों के लिए जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है
आज मन है कि पिछले ब्लॉग की बात को ही आगे बढ़ाऊं। सभी को समान अवसर मिले, यह कम्युनिस्टों का नारा हो सकता है, लेकिन इस विचार पर उनका एकाधिकार नहीं है। भारतीय विचार इससे कहीं आगे की बात करता है, हम समूचे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। एक विचार जो इससे पनपता है,…
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59. कम्युनिज़्म से आजादी…..
हम मनाने जा रहे हैं अपना स्वतंत्रता दिवस, अपना स्वाधीनता दिवस, 70 वर्ष पूर्व 15 अगस्त, 1947 को हमारा देश आज़ाद हुआ था, 200 वर्षों की अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद। फिर हमने कहा कि हम अब स्वयं के आधीन हैं, पराधीन नहीं हैं, लेकिन स्वच्छंद भी नहीं हैं। स्वच्छंदता की स्थिति तो अराजकता की…
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58. वहाँ पैदल ही जाना है…..
आज ऐसे ही, गीतकार शैलेंद्र जी की याद आ गई। मुझे ये बहुत मुश्किल लगता है कि किसी की जन्मतिथि अथवा पुण्यतिथि का इंतज़ार करूं और तब उसको याद करूं। मैंने कहीं पढ़ा था कि शैलेंद्र जी इप्टा से जुड़े थे और वहीं किसी नाटक के मंचन के समय पृथ्वीराज कपूर जी उनसे मिले, बताया कि…
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57. जब से गए हैं आप, किसी अजनबी के साथ
आज एक बार फिर संगीत, विशेष रूप से गज़ल की दुनिया की बात कर लेते हैं। भारतीय उप महाद्वीप में जब गज़ल की बात चलती है तब अधिकतम स्पेस गुलाम अली जी और जगजीत सिंह जी घेर लेते हैं। हालांकि इनसे बहुत पहले बेगम अख्तर जी से गज़ल गायकी लोकप्रिय हुई थी। इसके बाद जिस…
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56. दैर-ओ-हरम में बसने वालो —
यह जानकर, हर किसी को अच्छा लगता है कि कुछ लोग हमको जानते हैं। लेकिन दुनिया में हर इंसान अलग तरह का है, कितने लोग वास्तव में ऐसे होते हैं, जो किसी व्यक्ति को ठीक से जानते हैं। कुछ लोग हैं, जो हमारे साथ मुहल्ले में रहते हैं, वे हमें इस लिहाज़ से जानते हैं…
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55. मोहसिन मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी।
संगीत की एक शाम याद आ रही है, कई वर्ष पहले की बात है, दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में गज़ल गायक- गुलाम अली जी का कार्यक्रम था। मेरे बेटे ने मेरे शौक को देखते हुए मेरे लिए एक टिकट खरीद लिया था, रु.5,000/- का, अब टिकट आ गया था तो जाना ही था। खैर…
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54. जीवों का साहचर्य
आज गोवा में आए एक महीना हो गया। 3 जुलाई को दोपहर बाद यहाँ पहुंचे थे, गुड़गांव से। बहुत से फर्क होंगे जीवन स्थितियों में, जिनके बारे में समय-समय पर, प्रसंगानुसार चर्चा की जा सकती है। एक फर्क जो आज अचानक महसूस किया, सुबह अपनी बालकनी में टहलते हुए, उस पर चर्चा कर रहा हूँ।…