Category: Uncategorized
-
66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!
आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा। एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी थे- राना सहरी, जो उस समय लिखना शुरू कर रहे थे, बाद में उनकी लिखी कुछ गज़लें जगजीत सिंह जी ने भी गाईं, उनमें से ही एक को याद कर रहा हूँ।…
-
65. चंदू के चाचा, चांद पर!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज भारत के एक महान कैरेक्टर के बारे में बात कर रहा हूँ, जिन्हें अपनी तारीफ एकदम पसंद नहीं है, लेकिन उनमें गुण इतने हैं कि मेरा मन हो रहा है कि आज उनके बारे में बात कर ही लें। आपने यह दृष्टांत तो सुना ही…
-
202. हम अपने बुज़ुर्गों का ज़माना नहीं भूले!
आज एक छोटी सी गज़ल सागर आज़मी जी की लिखी हुई शेयर करने का मन हो रहा है, जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है। आज जबकि ऐसा माहौल है कि लोग किसी न किसी बहाने से नफरत फैलाने के काम में लगे हैं, इस प्रकार की गज़लें, कविताएं अच्छा संदेश देती हैं। इसमें उन…
-
64. आनंदोत्सव!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- मैंने तीन दिनों तक चले श्री श्री रविशंकर जी द्वारा संचालित आनंदोत्सव में भाग लिया। ऐसे शिविर उनकी संस्था- ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा आयोजित किए जाते रहते हैं, लेकिन जैसा मुझे बताया गया, 30 वर्षों के इन शिविरों के इतिहास में यह तीसरी बार था कि…
-
63. आस्था के नगीने फक़त कांच हैं!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज सोशल मीडिया के बारे में बात कर लेता हूँ, ये ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि मैं विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को संकलित कर लूं और उसके बाद यदि कभी ऐसा मन बने तो इनमें से…
-
201. देख लो क्या असर, कर दिया प्यार के नाम ने!
एक साथी ब्लॉगर की ब्लॉग पोस्ट पढ़ी जो एक बॉस के बारे में थी, जो रिटायर होने के बाद अपने जूनियर के अधीन कुछ समय तक ‘एडवाइज़र’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन बाद में वे यह महसूस करते हैं कि वहाँ स्वाभिमान की रक्षा करते हुए काम करते रहना संभव नहीं है और…
-
62. वह जो नाव डूबनी है मैं उसी को खे रहा हूँ !
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- जिस प्रकार मौसम पर बात करना बहुत आसान सा काम होता है, टाइम पास वाला काम, अगर आप इसको भी काम कहना चाहें, उसी प्रकार अपने मुहल्ले के बारे में बात करना भी एक अच्छा टाइम-पास होता था, विशेष रूप…
-
200. मैं अपने घर से चल पड़ा!
आजकल काफी पुराने ब्लॉग दोहराता रहा हूँ, लेकिन फिर भी यह 200 वां ब्लॉग आ ही गया, एक यह भी डबल सेंचुरी हुई ना! कोई भी क्षेत्र हो, हम अक्सर कोई सपना पालकर उसके पीछे चलते जाते हैं। एक गीत की पंक्ति है-‘ एक छलिया आस के पीछे दौड़े तो यहाँ तक आए’ अथवा ‘वो…
-
61. अरुण यह मधुमय देश हमारा !
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, पिछले वर्ष स्वाधीनता दिवस पर लिखा गया एक और पुराना ब्लॉग- आज याद आ रहा है, शायद 27 वर्ष तक, मैं स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर संदेश तैयार किया करता था, ये संदेश होते थे पहले 5 वर्ष (1983 से 1987)…
-
60. बच्चों के लिए जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- सभी को समान अवसर मिले, यह कम्युनिस्टों का नारा हो सकता है, लेकिन इस विचार पर उनका एकाधिकार नहीं है। भारतीय विचार इससे कहीं आगे की बात करता है, हम समूचे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। एक विचार जो…