Category: Uncategorized
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99. जार्जेट के पल्ले सी, दोपहर नवंबर की!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- बहुत बार लोग कविता लिखते हैं मौसम पर, कुछ कविताएं बहुत अच्छी भी लिखी जाती हैं। तुलसीदास जी ने, जब रामचंद्र जी, माता सीता की खोज में लगे थे, उस समय ऋतुओं के बदलने का बहुत सुंदर वर्णन किया है। पूरा मनोविज्ञान भरा है उस…
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98. आंखों में नमी, हंसी लबों पर!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट, संपादित रूप में- बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई कविता शुरू करते हैं, कुछ लाइन लिखकर रुक जाते हैं। फिर आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वो लाइनें भी दिमाग से नहीं मिट पातीं। कविता की ये पंक्तियां, कभी दीपावली के आसपास लिखी थीं।…
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231. – बंगलौर- एक रुका हुआ शहर?
महान कवि, गीतकार पद्म भूषण गोपाल दास ‘नीरज’ जी नहीं रहे। हिंदी कविता, गीतों, गज़लों और फिल्मी गीतों के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनको विनम्र श्रद्धांजलि के साथ प्रस्तुत है आज की ब्लॉग पोस्ट। पिछले सप्ताह कुछ काम के सिलसिले में बंगलौर जाना हुआ और मैं 3 दिन तक वहाँ रहा।…
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230. – ज़िंदगी का कनॉट प्लेस?
ये ब्लॉग पोस्ट मैं #IndiSpire पर सुझाए गए विषय #MeTime को ध्यान में रखते हुए लिख रहा हूँ। मैं ऐसा मानता हूँ कि इस का आशय ऐसा समय बिताने से है, जब आप जो करते हैं, अपने और सिर्फ अपने मन से करते हैं। आपके मस्तिष्क में कोई ऐसा टार्गेट नहीं होता जो किसी और…
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97. विकास प्राधिकरण!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज लखनऊ का एक सरकारी विभाग याद आ गया, जिससे काफी वर्षों पहले वास्ता पड़ा था, 2002 के आसपास, और इस विभाग की याद ऐसी तेजी से आई कि मैं जो काम कर रहा था, उसको बीच में छोड़कर ही इस अनुभव को शेयर कर…
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229. – जी आप शाहरुख खान बोल रहे हैं?
ये बेचारे शाहरुख का नाम मैंने ऐसे ही ले दिया, वैसे जब अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा जी ने शाहरुख का एक डायलॉग बोलकर उनका ज़िक्र किया था, तब उनको भी बहुत अच्छा लगा होगा ना! वैसे यह सच्चाई है कि इंसान को अपना नाम, पहला अथवा मुख्य नाम सुनना बहुत अच्छा लगता है। बचपन में अथवा…
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96. उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज वसीम बरेलवी साहब की एक गज़ल याद आ रही है, बस उसके शेर एक-एक करके शेयर कर लेता हूँ। बड़ी सादगी के साथ बड़ी सुंदर बातें की हैं, वसीम साहब ने इस गज़ल में। पहला शेर तो वैसा ही है, जैसा हम कहते हैं,…
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228. – मैं एक बादल आवारा!
बरसात के मौसम में हवाई यात्रा के दौरान आकाश में बादलों के कुछ चित्र खींचने का अवसर मिला। प्रकृति के, बादलों के चित्र तो वैसे भी अच्छे लगते हैं, लेकिन आकाश से, बादलों के ऊपर से लिए गए चित्र, वो तो विशेष होंगे ना! कभी यह भी लगता है कि जहाज से बाहर, उसके ऊपर…
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95. तव मूरति विधु उर बसहि, सोई स्यामता आभास!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग याद कर लेते हैं। आजकल नियोजक अपने कर्मचारियों का चयन करते समय तथा बाद में अनेक अवसरों पर उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण करते हैं। श्रीराम जी को लंका पर चढ़ाई करनी थी और उससे…
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227. – वृहस्पति वाहन- टीवीएस जुपिटर!
आज मैं अपने सभी साथियों के साथ एक अलग प्रकार के अनुभव को साझा करूंगा, जो एक लंबे समय के बाद एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में जाने का अनुभव है। काफी समय तक मैं एक प्रतिष्ठित संस्थान एनटीपीसी से जुड़ा रहा, रिटायर होने के काफी समय बाद यह नया अनुभव बहुत अच्छा लगा। यह अनुभव है…