Category: Uncategorized
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WOW: What If I could travel the world like this!
We keep living our lives in a formal atmosphere, most of the time discharging our duties- in office and at home. There is very little scope to dream, think of doing impossible looking things, even talking on such subjects lest people may not think that we have gone crazy! This time, the prompt on BlogAdda,…
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20. आंचल ही न समाए तो क्या कीजे!
चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। आज फिर से जीवन का एक पुराना पृष्ठ, कुछ पुरानी यादें, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर पहुंच गए लेकिन काफी कुछ पीछे छूट गया। मेरी मां, जिनके लिए हमारा वह पुराना मोहल्ला अपने गांव जैसा था, बल्कि मायका भी था क्योंकि उनके भतीजे- वकील साहब…
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दीवार की मरम्मत!
आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को पसंद नहीं करता, वह, उसके नीचे जमी हुई जमीन को नीचे से फुला…
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19. हम खें जुगनिया बनाय गए, अपुन जोगी हो गए राजा!
आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग,जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस परीक्षा में मैं सफल हुआ और उसके आधार पर ही आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक पद…
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मैं पानी की कलाई हूँ!
कविता के क्षेत्र में जो लोग मेरे लिए गुरुतुल्य रहे हैं, उनमें से एक हैं डॉ. कुंवर बेचैन जी। मैं एक छात्र के रूप में कुछ समय के लिए गाजियाबाद के एम.एम.एच. कालेज भी गया था, मैं तो विज्ञान का छात्र था, उस समय भी डॉ. कुंवर बेचैन जी उसी कालेज में पढ़ाते थे। उनकी…
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सर्दी की रात में सैर !
आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- सर्दी की रात में सैर सर्दियों में शाम की सैर के लिए- कोई नहीं था मेरे साथ, जिससे कर सकूं कुछ बात,…
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This too will pass!
I remember an inspirational story which I read long back. Somebody was given 2 packets, with something in each and was instructed to open first at a time, when he needed help in life and the second one, again when he feels that he needs help and guidance. After some time that person faced very…
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18. ज़िंदगी के हाथों में, कौन सा निवाला है!
चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- दिल्ली से जाल समेटने से पहले, कुछ और बातें कर लें। वैसे तो रोज़गार की मज़बूरियां हैं वरना कौन दिल्ली की गलियां छोड़कर जाता है। वैसे भी यह तो अतीत की बात है, मैं इसे कैसे बदल सकता हूँ?…
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WOW : A Short trip under the Sea!
Knock, knock- dreams keep knocking but we are not so open, not so ready to accept them as reality, even for some time. Such is the seriousness overshadowing of our life, life situations and more than that our unwillingness to live our dreams! Anyway I am just going to work on a prompt, which in…
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वो तेरे प्यार का ग़म !
आज फिर से अनुवाद करने के बहाने मुकेश जी का गाया एक गीत याद कर रहा हूँ, यह गीत उन्होंने 1970 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘माई लव’ के लिए गाया है, संगीतकार हैं- दान सिंह जी और इसके गीतकार हैं- आनंद बक्षी जी। यह गीत सुनकर ही महसूस किया जा सकता है कि मुकेश जी…