Category: Uncategorized
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यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – आज गुलाम अली जी का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा है और इसका संगीत अनु मलिक जी ने तैयार किया है। यह गीत वैसे ही सुंदर लिखा गया है और गुलाम अली जी की गायकी…
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My travel destination after defeat of COVID-19
We have been facing the conditions of the spread of this dreaded Pandemic called COVD-19 in India for almost 5 months now. It is one of the important topics we often discuss, we sometimes feel somewhat satisfied that its impact has been lesser in India compared to so many countries, considering the population of our…
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यही होता है तो आखिर यही होता क्यों हैं!
कैफी आज़मी साहब की एक गजल आज याद आ रही है| कैफी साहब हिंदुस्तान के एक प्रसिद्ध शायर रहे हैं और बहुत सी सुंदर रचनाएँ उन्होंने हमें दी हैं, फिल्मों में भी उनकी बहुत सी रचनाओं का इस्तेमाल किया गया और आज जो गज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ उसको जगजीत सिंह साहब ने गाया…
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तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला!
फिल्म-संबंध, जो 1969 में रिलीज़ हुई थी, उसका एक गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताएं लिखते थे, जैसे ‘आओ बच्चे तुम्हें दिखाएँ झांकी हिंदुस्तान की’ आदि-आदि| आज के इस गीत के लिए संगीत दिया है ओ पी नैयर जी का और इसे गाया है मेरे प्रिय गायक- मुकेश…
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स्वरों के खिलाड़ी-बंदिश बैंडिट्स!
आज मैं एमेजॉन प्राइम वीडियोज़ पर इन दिनों प्रदर्शित की जा रही वेब सीरीज़- ‘बंदिश बेंडिट्स’ को देखने के अपने अनुभव शेयर कर रहा हूँ| मुझमें इतना आत्मविश्वास या कहें कि अहंकार नहीं है कि मैं एक समीक्षक के रूप में खुद को प्रस्तुत करूं और आपको बताऊँ कि इसको देखना चाहिए या नहीं| बस…
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इतना सा मैं- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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लो,एक बजा दोपहर हुई!
हिन्दी मंचों पर गीतों के दिव्य हस्ताक्षर स्वर्गीय भारत भूषण जी, जो मेरठ, उत्तर प्रदेश से थे और उनके अनेक गीत मैं हमेशा गुनगुनाता रहा हूं, जैसे – चक्की पर गेहूं लिए खड़ा, मैं सोच रहा उखड़ा-उखाड़ा, क्यों दो पाटों वाली चाकी, बाबा कबीर को रुला गई’, मैं बनफूल, भला मेरा- कैसा खिलना, क्या मुरझाना’…
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फिर सुशांत की बात!
आज एक बार फिर से सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करने का मन हो रहा है| सुशांत की मौत को दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और समय बीतने के साथ यह तो स्पष्ट होता जा रहा है कि सुशांत जी ने आत्महत्या तो नहीं ही की है| कौन लोग थे…
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AWARD Nomination
GREAT ACHIEVER “महासिद्धी” BLOGGER AWARD I (GAMBA I) I have been nominated by my fellow blogger Sh. Kamal Shreshtha- Kamal’s Blogginh Café- @kamalsbloggingcafe (https://kamalsbloggingcafe.wordpress.com) for the GREAT ACHIEVER “महासिद्धी” BLOGGER AWARD I (GAMBA I). I am very much thankful to Mr. Kamal Shreshtha for that and request you all to visit his site mentioned above…
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ब्लैक आउट में रोशनी की तरह!
मैंने पहले भी सूर्यभानु गुप्त जी की कुछ रचनाएँ शेयर की हैं| वे बहुत सुंदर रचनाएँ, विशेष रूप से गज़लें लिखते हैं, जिनमें उन्होंने अनेक एक्सपेरीमेंट किए हैं| कुछ शेर तो उनके मुझे अक्सर याद आते हैं, जैसे – ‘जब अपनी प्यास के सहरा से डर गया हूँ मैं, नदी बांध के पत्थर उतर गया…