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हमेशा तेरी डगर में रहा!
वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में,हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा । गोपालदास “नीरज”
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अजनबी के घर में रहा!
तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा । गोपालदास “नीरज”
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दिल चुरा कर न हमको !
स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की एक रूमानी कविता आज शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी अपने समय के सुरीले कवियों, गीतकारों में गिने जाते थे और कवि सम्मेलनों में उनका काव्य पाठ सुनने के लिए भी श्रोता लालायित रहते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की यह कविता– दिल चुरा…
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ख़यालों तक गईं गोलाइयां हैं!
मुतास्सिर लोग यूँ हैं रोटियों से,ख़यालों तक गईं गोलाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त
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बिल्डिंगें बांहों की सूरत!
नगर की बिल्डिंगें बांहों की सूरत,बशर टूटी हुई अंगड़ाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त