Category: Uncategorized
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अंतरतम में स्थित वह – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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अपनी छोटी-सी ज़मीन पर , अपनी उगा फसल!
आज स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इस गीत में रंजक जी ने नए कवियों को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया है कि वे मौलिकता पर पूरा ध्यान दें। अक्सर यह होता है कि लोग तेजी से आगे बढ़ने के लिए दूसरों की नकल करने लगते हैं, बहुत से…
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Opposition turning irrelevant in India!
I normally avoid discussing about politics. It appears that there is nothing serious to discuss about today’s politicians, in India. In fact when I think of our politicians, specially those in opposition today, it appears that Mr. Modi has turned them into a big zero. Sometimes I feel that some film personalities, like…
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जब राजा फँसता दिखे पैदल दे पिटवाय!
आज मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर, स्व. गोपाल दास ‘नीरज’ जी के लिखे कुछ दोहे शेयर कर रहा हूँ, जैसे गज़ल के शेरों में संक्षेप में बड़ी बात कही जाती है, दोहे भी बहुत लंबे समय से, थोड़े में अधिक बात कहने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं, तुलसीदास जी के और उनसे भी…
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मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला!
आज गुलाम अली साहब का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे 1990 में रिलीज़ हुई फिल्म- आवारगी में फिल्माया गया था, गीत को लिखा है- आनंद बक्षी जी ने और संगीत अनु मलिक जी का है। कुल मिलाकर यह गीत गुलाम अली जी ने बड़े सुंदर ढंग से गाया है और बहुत…
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कृतघ्न संताप – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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तव मूरति विधु उर बसहि, सोई स्यामता आभास!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- आज गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग याद कर लेते हैं। आजकल नियोजक अपने कर्मचारियों का चयन करते समय तथा बाद में अनेक अवसरों पर उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण करते हैं। श्रीराम जी को लंका पर चढ़ाई करनी…
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पथ ही मुड़ गया था – डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन
हिंदी साहित्य का भंडार इतना वृहद है, एक से एक श्रेष्ठ कवि हमारे देश में हुए हैं, जिन्होंने साहित्य में अपना अमूल्य योगदान किया है। कुछ कवि हमें व्यक्तिगत रूप से ज्यादा अच्छे लगते हैं, हम उनकी रचनाओं को अक्सर याद करते हैं लेकिन कितने ही मां भारती के सपूत हैं, जिनको हम भूल जाते…
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Two Yards Of Land!
This life of ours is termed as ‘Mirage’ by many learned people and Saints. We come to this world, we learn, acquire knowledge and skills as per our requirements and capacity and then we wish to get into a service or business, that we are able to get into for living a life fulfilling our…
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एक पंछी भी यहाँ शायद नहीं है!
दुष्यंत कुमार जी हिंदी के एक श्रेष्ठ रचनाकार रहे हैं, हिंदी कविता में उनका अच्छा-खासा योगदान है लेकिन आम जनता के बीच उनको विशेष ख्याति उस समय मिली जब उन्होंने आपात्काल में विद्रोह का स्वर गुंजाने वाली गज़लें लिखीं, बाद में इन गज़लों को एक संग्रह में सम्मिलित किया गया, जिसका शीर्षक है- ‘साये में…