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वह विशाल मन दो- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ !
आज मैं भारतवर्ष में हिंदी के एक महान कवि, जिन्हें ओज और शृंगार दोनो प्रकार की कविताओं में महारत हासिल थी, वे सांसद भी रहे लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। ऐसे महान रचनाकार स्व. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, आइए देखें कि वे इस कविता…
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समुद्रतट पर-रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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हालचाल ठीक-ठाक है!
आज कुछ इधर-उधर की बात कर लेते हैं। कल एक फिल्म देखी थी- ‘पागलपंती’। वैसे तो ये एक अच्छी कॉमेडी मूवी है, जिसमें लॉजिक का ज्यादा महत्व नहीं होता। खास बात यह लगी कि इस फिल्म में निर्माता ने नीरव मोदी (फिल्म में नाम-नीरज मोदी रख दिया है) को भी शामिल कर लिया और फिल्म…
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Ideas are like a flowing river?
We are living in an interactive world, every moment we impress others and get impressed by others too. There is a famous principle of dilectics, which says that many a times when we are not able to convince the other person with our ideas on a given subject, we accept his ideas and vice-versa .…
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ज़िंदगी तुझको तो, बस ख़्वाब में देखा हमने!
आज एक प्रसिद्ध गज़ल को शेयर कर रहा हूँ, जिसे शहरयार जी ने लिखा था औरऔर इसको 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म- उमराव जान के लिए, आशा भौंसले जी ने खय्याम जी के संगीत निर्देशन में गाया था। यह खूबसूरत गज़ल एक तरह से जीवन फिलासफी को बताती है। ज़िंदगी को बहुत सी कविताओं में,…
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धैर्य – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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पधारो महाराज!
देश की और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय तक कांग्रेस में राहुल गांधी के निकटतम साथी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लंबे समय तक उपेक्षा सहने के बाद कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। पहले भी कांग्रेस के वर्तमान शाही परिवार…
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हाय रे अकेले छोड़ के जाना, और न आना बचपन का!
आज मुझे अपने परम प्रिय गायक जी का गाया, फिल्म देवर का एक गीत याद आ रहा है, जो अभिनेता धर्मेंद्र जी पर फिल्माया गया था। इस गीत को लिखा था आनंद बख्शी जी ने और रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने अपने मधुर स्वर में इस गीत को गाकर अमर कर…
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संडे के दिन रास रचा जाइयो, बुला गई राधा प्यारी!
एक बार फिर से मैं, होली के पावन अवसर पर, सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, स्व. अल्हड़ बीकानेरी जी की लिखी इस आधुनिक रसिया के साथ- कान्हा बरसाने में आ जइयो, बुला गई राधा प्यारी। असली माखन कहाँ मिलैगो, शॉर्टेज है भारी, चर्बी वारौ बटर मिलैगो, फ्रिज में हे बनवारी, आधी चम्मच मुख…