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आज सड़क के जीव उदास हैं!
आज बाबा नागार्जुन जी की एक प्रसिद्ध कविता याद आ रही है- ‘अकाल और उसके बाद’। इस कविता में अकाल के प्रभाव को बड़े सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। जब घर में चूल्हा जलता है तब केवल घर के मानव सदस्य ही तृप्त नहीं होते अपितु ऐसे अनेक जीव भी भोजन पाते हैं, जिनमें…
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पर अपने सपनों को पंख कब मिले!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई कविता शुरू करते हैं, कुछ लाइन लिखकर रुक जाते हैं। फिर आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वो लाइनें भी दिमाग से नहीं मिट पातीं। कविता की ये पंक्तियां, कभी दीपावली के आसपास ही लिखी…
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केवल कीं नंगी अठखेलियाँ हवा ने!
एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि-नवगीतकार रहे स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ।हूँ। यह गीत रंजक जी के 1969 में प्रकाशित हुए नवगीत संकलन ‘हरापन नहीं टूटेगा’ से लिया गया है। आजकल दुनिया में जो कोरोना की महामारी फैली है, हजारों लोग इस भयावह रोग की भेंट…
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मरण बाद मैंनू सजा के चलणगे!
आज फिर से एक पंजाबी गीत शेयर कर रहा हूँ, यह गीत भी श्री शिव कुमार बटालवी जी ने लिखा है, वैसे इसे लोक गीत भी कहा जाता है, संभवतः कुछ लोग लोक मन से इतना जुड़ जाते हैं कि उनके गीत को समाज अपना लेता है। इस गीत को श्री आसा सिंह मस्ताना जी…
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मैं तैनू पीना के तू मैंनू पीनी?
आज एक अलग तरह का गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे ज़नाब गुलाम अली जी ने अनोखे अंदाज़ में गाया है। श्री शिव कुमार बटालवी जी ने इस गीत को लिखा है। अक्सर कवि-शायर लोग शराब की तारीफ में बहुत सी कविताएं और गीत लिखते हैं। आज का यह गीत शराब के वीभत्स रूप को…
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चेहरा है जैसे झील मे हँसता हुआ कंवल!
जैसा कि मेरे नियमित पाठक जानते होंगे, मुकेश जी मेरे परम प्रिय गायक हैं, जब मैं फिल्मी गीत शेयर करता हूँ तब सबसे पहले मेरा ध्यान मुकेश जी के गाये हुए गीतों की ओर जाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य गायकों के प्रति मेरा उतना सम्मान नहीं है। ऐसे भी लोग हैं…
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Testing times for the human race!
We often learn from our scriptures, in the preachings and poetry of our Saints that it is our miseries which teach us the most effective lessons. I remember a famous poetry piece I think it is written by Goswami Tulsidas Ji, which says- ‘Sukh ke maathe sil pare, naam hriday se jaaye, balihari ya dukh…
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ज्ञानेंद्रियां- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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मेरा कुर्ता सिला दुखों ने, बदनामी ने काज निकाले- गोपालदास नीरज
आज स्व. गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नीरज जी को गीतों का राजकुंवर कहा गया है लेकिन इस गीत में उन्होंने खुद को पीड़ा का राजकुंवर कहा है। नीरज जी ने अन्य अनेक लोगों के साथ मिलकर हिंदी के साहित्यिक गीतों को भारतीय फिल्मों में स्थान दिलाया था। स्व.…
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अपनी भाषा की रोशनी में चलता रहूँ – रमेश रंजक
आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक रहे स्व. रमेश रंजक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह जानकर अच्छा लगता है कि रमेश रन्जक जी से कुछ बार बात करने का, उनके नवगीत सुनने का अवसर मिला और एक बार उन्होंने मेरा गीत सुनकर उसे नवगीत संकलन अंतराल-4 में प्रकाशित करने…