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लेकिन मकाँ नहीं मिलता!
निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं| उनमें कवि-शायर और संत, सबके गुण शामिल थे| क्या दोहे, क्या ग़ज़लें और क्या गीत, हर जगह उन्होंने अपना कमाल दिखाया था| उनकी प्रमुख विशेषता थी सरल भाषा में गहरी बात कहना| लीजिए आज निदा फ़ाज़ली साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- कभी किसी को…
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ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!
हरिवंश राय बच्चन जी हिन्दी की गीत परंपरा के एक प्रमुख हस्ताक्षर थे| किसी समय कवि सम्मेलनों में उनके गीतों की धूम होती थी और लोग रात-रात भर जागकर उनके मधुर गीतों का आनंद लेते थे| उनकी प्रमुख विशेषता थी सरल भाषा में गहरी बात कहना| लीजिए आज हरिवंश राय बच्चन जी के इस गीत…
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Alisha was her name!
Yes, she was Alisha, though if she reads it, she would say I am still Alisha, I am still there, Yes in a way but now she may not read it and if she reads and says something, we may not be able to listen to that! Was it yesterday or 2 – 3 days…
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वो ज़माना याद है!
हसरत मोहानी जी की एक ग़ज़ल के कुछ शेर आज शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल के कुछ शेर ग़ुलाम अली जी ने भी गाए थे| ग़ुलाम अली साहब की आवाज़ में इस ग़ज़ल का फिल्म- ‘निकाह’ में बड़ा खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है| लीजिए आज हसरत मोहानी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए-…
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काला काला है युगबोध!
केदारनाथ सिंह जी आधुनिक हिन्दी कविता का एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे हैं, जिनको साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए थे| हर कवि का अपना अलग अंदाज़-ए-बयां होता है| आज केदारनाथ सिंह जी के रचनाकर्म की बानगी उनकी इस कविता के माध्यम से देखते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है केदारनाथ सिंह जी…
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मेरे हमसफ़र उदास न हो!
आज साहिर लुधियानवी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| साहिर जी ने भारतीय फिल्मों को बहुत सुंदर गीत दिए हैं और वे भारत के नामवर शायरों में शुमार होते थे और अपनी कला और स्वाभिमान के लिए जाने जाते थे| लीजिए आज साहिर जी के इस गीत का आनंद लीजिए- मेरे नदीम मेरे…
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यार जुलाहे!
आज गुलज़ार साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ, गुलज़ार साहब की शायरी उनके अंदाज़ ए बयां के कारण अलग से पहचानी जाती है| आज की इस नज़्म में भी उन्होंने इंसानी रिश्तों में, प्रेम संबंधों में पड़ जाने वाली गांठों का बड़ी सहजता और प्रभावी ढंग से बयान किया है, जुलाहे की कलाकारी…
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चांद पागल है!
आज राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, राहत साहब की शायरी में अक्सर एक ‘पंच’ होता है जो अचानक श्रोताओं को अपनी ओर खींच लेता है, कोई ऐसी बात जिसकी हम सामान्यतः कविता / शायरी में उम्मीद नहीं करते, जैसे आज की इस ग़ज़ल में ही- ‘चांद पागल है, अंधेरे की…
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वर्ना रो पड़ोगे!
आज एक बार फिर मैं अपने अग्रज और गुरु तुल्य तथा हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रचना अपना परिचय स्वयं देती है, लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का यह गीत- बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के फूलवर्ना रो पड़ोगे।…