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मुझ पे लटें बिखराए!
हम सबके प्यारे मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का गाया एक बहुत सुंदर युगल गीत आज शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी ने अनेक बहुत प्यारे गीत लता जी के साथ गए थे, जो उनको अपना बड़ा भाई मानती थीं, वहीं सुमन कल्याणपुर जी के साथ भी मुकेश जी ने कुछ बहुत प्यारे गीत…
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जगमग जगमग!
राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कविताएं लिखने वाले, कविता की प्राचीन परंपरा के कवि स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मुझे याद है कि जब मैं छोटी कक्षाओं का ही विद्यार्थी था तब मैंने द्विवेदी जी की कुछ कविताएं पाठ्यक्रम में पढ़ी थीं | गांधी जी को लेकर लिखी…
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हमारा कल भी क्या होगा!
आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| देव कोहली जी का लिखा यह गीत मुकेश जी ने फिल्म- ‘जीवन रेखा’ के लिए गाया था, इसका संगीत तैयार किया था जगदीश राजपुरोहित जी ने| कभी कभी हमें लगता था कि खुशियां हमारे लिए बनी…
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परंपरा
आज राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में दिनकर जी ने बड़े ही शालीन तरीके से परंपरा और क्रांति दोनों के महत्व और प्रासंगिकता को समझाया है और यह भी बताया है कि दोनों का ही समझदारी के साथ निर्वाह किया जाना चाहिए| इनमें से कुछ…
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मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़ुबां!
आज हसरत जयपुरी साहब का लिखा एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत 1955 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘आब ए हयात’ के लिए सरदार मलिक जी के संगीत निर्देशन में हेमंत कुमार जी ने अपने सुरीले अंदाज़ में गाया था| और हां इस फिल्म के नायक थे प्रेम नाथ जी| यह फिल्म तो नहीं…
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जी यहां घबराता है!
आज सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी अपने समय के प्रमुख साहित्यिक कवियों में शामिल थे और उस समय की प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादन मण्डल में शामिल थे| बाकी तो कविता खुद अपनी बात कहती है, लीजिए प्रस्तुत है सर्वेश्वर जी की यह कविता अजनबी…
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ओ मेरी शर्मीली!
आज हिन्दी के अत्यंत लोकप्रिय गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी को याद करते हैं उनके एक फिल्मी गीत के माध्यम से| फिल्मों में जैसा आप जानते हैं सिचुएशन के हिसाब से गीत लिखे जाते हैं| यह गीत 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘शर्मीली’ के लिए नीरज जी ने लिखा था और शशि कपूर जी…
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मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें!
ज़नाब सुदर्शन फ़ाक़िर साहब एक श्रेष्ठ शायर रहे हैं, उनके बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें आदि विभिन्न गायकों ने गायी हैं| वैसे कवि शायर आदि भी अजीब लोग होते हैं, एक मामूली सी अदा के लिए वे कुछ भी कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं, कम से कम कविता और शायरी में तो ऐसा ही…
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महबूब मेरे महबूब मेरे!
आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| मजरूह सुल्तानपुरी साहब का लिखा यह गीत मुकेश जी और लता जी ने फिल्म- ‘फिल्म पत्थर के सनम’ के लिए गाया था, इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की सुरीली जोड़ी ने| लीजिए प्रस्तुत है…
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जब मुझे भय सताता है!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर करने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्टआज से भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि जॉन कीट्स की अंग्रेजी भाषा में लिखी गई एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल अंग्रेजी कविता प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा…