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सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं !
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अपने सबसे अलग अंदाज़ ए बयां के लिए प्रसिद्ध थे| जो एक अलग प्रकार का ‘पंच’ उनकी रचनाओं में आता था वो पाठकों और श्रोताओं का मन मोह लेता था| लीजिए प्रस्तुत है राहत इन्दौरी साहब…
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खामोशी पहचाने कौन 5
किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन । निदा फाज़ली
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खामोशी पहचाने कौन 4
मैं उसकी परछाई हूँ यावो मेरा आईना हैमेरे ही घर में रहता हैमेरे जैसा जाने कौन । निदा फाज़ली
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खामोशी पहचाने कौन 3
जाने क्या-क्या बोल रहा थासरहद, प्यार, किताबें, ख़ूनकल मेरी नींदों में छुपकरजाग रहा था जाने कौन । निदा फाज़ली
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खामोशी पहचाने कौन 2
सदियों-सदियों वही तमाशारस्ता-रस्ता लम्बी खोजलेकिन जब हम मिल जाते हैंखो जाता है जाने कौन । निदा फाज़ली
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ख़ामोशी पहचाने कौन 1
मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौनआवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन । निदा फाज़ली
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क्यों विष जान पिया करता है!
आज मैं स्वर्गीय बलबीर सिंह जी ‘रंग’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘रंग’ जी अपनी अलग प्रकार की अभिव्यक्ति शैली के लिए जाने जाते थे| इस गीत में ‘रंग’ जी ने अपने अंदाज़ में यह कहा है कि कवि गीत क्यों लिखता है| बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की बहुत लोकप्रिय पंक्तियाँ जो मैं…
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फिर नशे में 4
मुझको कदम कदम पे भटकने दो वाइजोंतुम अपना कारोबार करो मैं नशे में हूँ| फिर बेख़ुदी में हद से गुजरने लगा हूँ मैंइतना न मुझ से प्यार करो मैं नशे में हूँ| शाहिद कबीर
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फिर नशे में 3
गिरने दो तुम मुझे मेरा साग़र संभाल लो इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ | शाहिद कबीर