Category: Uncategorized
-
कोई शहर से आया होगा!
आज विख्यात अभिनेत्री शबाना आज़मी के पिता और हमारे देश के जाने माने शायर ज़नाब कैफ़ी आज़मी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूं| कैफ़ी आज़मी साहब को एक विद्रोही शायर के रूप में भी जाना जाता है| एक अनोखा ही अंदाज़ था उनका बात कहने का, जैसे ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,…
-
आवारगी 6
कल रात तनहा चाँद को देखा था मैंने ख़्वाब में‘मोहसिन’ मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी। मोहसिन नक़वी
-
आवारगी 5
ये दर्द की तनहाइयाँ, ये दश्त का वीराँ सफ़रहम लोग तो उकता गये अपनी सुना, आवारगी। मोहसिन नक़वी
-
आवारगी 4
इक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबबसहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगी। मोहसिन नक़वी
-
आवारगी 2
ये दिल, ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया, आवारगीइस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ, आवारगी। मोहसिन नक़वी
-
चारों ओर मचान है!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी देश के अत्यंत सृजनधर्मी जनवादी नवागीतकार थे| अनेक बार उनको कवि गोष्ठियों में सुनने का अवसर मिला और मेरे लिए गर्व की बात है कि उन्होंने मेरा एक नवगीत अंतराल 4 में छपने के लिए भेजा था| रंजक जी के अनेक गीत किसी समय मुझे कंठस्थ थे, जैसे ‘बंधु रे हम…