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कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया!
आज मैं साहिर लुधियानवी साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| साहिर साहब का यह गीत फिल्म-‘गुमराह’ के लिए महेंद्र कपूर जी ने गाया था और इसका संगीत तैयार किया था रवि जी ने| लीजिए आज प्रस्तुत है, साहिर लुधियानवी साहब का यह गीत – आप आए तो ख़याल-ए-दिल-ए नाशाद आयाकितने भूले हुए…
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ज़िंदगी की शाम हो जाए!
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए| बशीर बद्र
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लब-ए-इज़हार पे ताले होंगे!
हम बड़े नाज़ से आये थे तेरी महफ़िल में,क्या ख़बर थी लब-ए-इज़हार पे ताले होंगे| परवेज़ जालंधरी
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उजाले ही उजाले होंगे!
शम्मा ले आये हैं हम जल्वागह-ए-जानाँ से,अब दो आलम में उजाले ही उजाले होंगे| परवेज़ जालंधरी